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आपसी विवादों को कोर्ट-कचहरी में ले जाने से पहले अंजुमन इस्लामिया की अदलिया से संपर्क करें

Updated at : 13 Jul 2025 8:50 PM (IST)
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आपसी विवादों को कोर्ट-कचहरी में ले जाने से पहले अंजुमन इस्लामिया की अदलिया से संपर्क करें

आपसी विवादों को कोर्ट-कचहरी में ले जाने से पहले अंजुमन इस्लामिया की अदलिया से संपर्क करें

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लोहरदगा़ अंजुमन इस्लामिया लोहरदगा की अदलिया कमेटी ने अंजुमन कार्यालय में बैठक कर एक दर्जन से अधिक पारिवारिक और सामाजिक मामलों की सुनवाई की. कमेटी ने इनमें से पांच जटिल विवादों का आपसी सहमति से शांतिपूर्ण निष्पादन कर एक बार फिर सामाजिक सुलह-संवाद की मिसाल पेश की. सुनवाई में अदलिया कमेटी के प्रमुख सदर अब्दुल रउफ अंसारी, सेक्रेटरी शाहिद अहमद बेलू, नाइब सदर सैयद आरीफ हुसैन, सहसचिव अल्ताफ कुरैशी, सदस्य इरशाद अहमद, ऑफिस सेक्रेटरी मौलवी अबुल कलाम तैगी व मोहम्मद असगर तैगी मौजूद थे. मौके पर सुमैया परवीन बनाम अरशद अंसारी (न्यू रोड, भुजनियां) पति-पत्नी विवाद को दोनों पक्षों की सहमति से सुलझाया गया. आजाद अंसारी बनाम फहमीदा खातून (इस्लाम नगर) पुराने विवाद का समाधान आपसी सहमति से किया गया. सरवर खलीफा बनाम शबनम परवीन चांदनी (थानाटोली बनाम हिन्दपीढ़ी रांची) पति-पत्नी के बीच वर्षों से चल रहा मतभेद समाप्त कराया गया. मो शाबीर अंसारी बनाम समीना खातून (मारंगलोइया, बालूमाथ बनाम डांड़ू अंबाटोली) दोनों पक्षों की रजामंदी से मामला शांतिपूर्वक समाप्त कराया गया. रकीब अंसारी बनाम परवीन (जीमा बनाम अमलाटोली) मामले की आंशिक सुनवाई के बाद अगली तारीख तय की गयी. इसके अतिरिक्त कई मामलों पर विचार-विमर्श किया गया. जिसका जांच उपरांत जल्द निपटारे का आश्वासन कोटी द्वारा दिया गया. बैठक में सदर अब्दुल रउफ अंसारी ने जिले के मुस्लिम समाज से अपील की कि आपसी विवादों को कोर्ट-कचहरी में ले जाने से पहले अंजुमन इस्लामिया की अदलिया से संपर्क करें. उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश होती है कि हर मामला इंसाफ और आपसी सहमति से सुलझे. यदि अदलिया में समाधान नहीं हो, तब अन्य विकल्प अपनायी जाये. सेक्रेटरी शाहिद अहमद बेलू ने बताया कि अदलिया में लिये गये फैसले किसी पक्ष की हार या जीत नहीं बल्कि दोनों पक्षों की सहमति पर आधारित होती है. जिससे रिश्तों में कड़वाहट की जगह आपसी समझदारी विकसित होती है. अंजुमन इस्लामिया की अदलिया कमेटी सामाजिक न्याय और आपसी सौहार्द का जीवंत उदाहरण बन चुकी है. जिस समाज में ऐसे प्रयास हो रहे हों, वहां विवादों का समाधान न केवल सरल बल्कि संवेदनशील और सामूहिक होता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH AMBASHTHA

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By SHAILESH AMBASHTHA

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