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किसानों को उन्नत तकनीक व सरकारी योजनाओं की जानकारी दी

Updated at : 10 Jun 2025 11:13 PM (IST)
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किसानों को उन्नत तकनीक व सरकारी योजनाओं की जानकारी दी

किसानों को उन्नत तकनीक व सरकारी योजनाओं की जानकारी दी

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किस्को़ बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची, लोहरदगा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, आइसीएआर के वैज्ञानिक तथा कृषि विभाग के साथ-साथ प्रगतिशील किसानों की मौजूदगी में 29 मई से 12 जून तक 15 दिनों तक लोहरदगा जिले के 135 गांव में संचालित विकसित कृषि संकल्प अभियान के 13वें दिन मंगलवार को वैज्ञानिकों की टीम ने गांवों में पहुंच कर अभियान चलाया. इसमें केवीके के उद्यान वैज्ञानिक डॉ राकेश रंजन, डॉ भारती, आइसीएआर पलांडू के वेटरनरी साइंटिस्ट रीना कमल तथा शुभम कुमार ने जिले के कूड़ु प्रखंड अंतर्गत जिमा, सरनाटोली व जामुनटोली ग्राम में अभियान चलाया. दूसरी टीम केवीके के मुख्य वैज्ञानिक डॉ हेमंत कुमार पांडेय, फार्म मैनेजर कौशिक चटर्जी, आइसीएआर प्लांडू से मनीष कुमार सिंह व सहायक पंकज सिंह द्वारा भंडरा प्रखंड के तेतरपोका, सोरंदा व बलसोता ग्राम में और तीसरी टीम केवीके वैज्ञानिक डॉ सुषमा सरोज सुरीन, एलिशमा खाखा, वरीय वैज्ञानिक रेशमा सिंदे, आइसीएआर पलांडू से डॉ नंदकिशोर थोम्बरे एवं पीयूष पुष्कर द्वारा कैरो प्रखंड के टाटी, खरता व सढ़ाबे में अभियान चलाया गया. जिसमें उक्त तीनों टीम द्वारा विभिन्न गांव के किसानों के बीच केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं एवं कृषि अंतर्गत नई तकनीक विभिन्न फसलों का चयन संतुलित उर्वरकों का उपयोग एवं सॉयल हेल्थ कार्ड की उपयोगिता के संबंध में जागरूक किया गया. अभियान के अंतर्गत कृषि से जुड़े मुख्य विषयों पर चर्चा कर उन्नत तकनीकों,नई किस्मों और सरकारी योजनाओं के बारे में किसानों को जानकारी दी गयी. उत्पादकता वृद्धि के मूल मंत्र तथा समय पर बुवाई, प्रमाणित तथा उन्नत बीज का उपयोग, बीजोपचार, मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रयोग, गर्मी में खेत की गहरी जुताई, उचित बीज दर एवं फसल की कतार में बुवाई, दलहनी एवं तिलहनी फसलों में जिप्सम का उपयोग, फव्वारा, ड्रिप,पाइप लाइन का उपयोग, सिंचाई का उपयोग आदि के बारे में जागरूक किया गया. साथ ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और उसका प्रचार-प्रसार करने का कार्य अभियान में किया गया. किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में बतायी गयी विभिन्न फसलों में संतुलित तत्व के प्रयोग के लिए जागरूक किया गया. किसानों को बदलते हुए जलवायु के अनुरूप खेती करने और कम लागत में बेहतर आमदनी पर जानकारी दी गयी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH AMBASHTHA

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