888 को बाल विवाह की बेड़ियों से मिली मुक्ति, 63 बच्चों को ट्रैफिकिंग गिरोह से बचाया

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888 को बाल विवाह की बेड़ियों से मिली मुक्ति, 63 बच्चों को ट्रैफिकिंग गिरोह से बचाया

888 को बाल विवाह की बेड़ियों से मिली मुक्ति, 63 बच्चों को ट्रैफिकिंग गिरोह से बचाया

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लोहरदगा़ लोहरदगा जिले के लिए साल 2025 बाल सुरक्षा और संरक्षण के दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक उपलब्धि वाला वर्ष साबित हुआ है. जिला प्रशासन, पुलिस और नागरिक समाज संगठनों के साझा प्रयासों से सैकड़ों मासूमों के जीवन में उम्मीद की नयी किरण जागी है. इस वर्ष जिले में सक्रिय संस्था लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान (एलजीएसएस) ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों और ग्राम स्तर के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर कुल 951 बच्चों को शोषण और कुप्रथाओं की भेंट चढ़ने से बचाया है. बाल विवाह और ट्रैफिकिंग पर कड़ा प्रहार : संस्थान द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे बड़ी सफलता बाल विवाह रोकने में मिली है, जहां 888 बच्चों को समय रहते इस सामाजिक बुराई से बचाया गया. वहीं, बाल दुर्व्यापार (ट्रैफिकिंग) के चंगुल से 63 बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया गया, जिनमें 36 लड़कियां और 27 लड़के शामिल हैं. मुक्त कराये गये ये बच्चे अवैध मजदूरी और अन्य शोषणकारी परिस्थितियों में धकेले जा रहे थे. देशव्यापी नेटवर्क का मिला सहयोग : बताते चलें कि लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है, जो देश के 451 जिलों में बाल अधिकारों के लिए सक्रिय है. एलजीएसएस के प्रोग्राम मैनेजर विक्रम कुमार ने बताया कि यह वर्ष जिला प्रशासन, पुलिस, ग्राम पंचायतों और शिक्षकों के साथ प्रभावी समन्वय का परिणाम है. पुनर्वास पर दिया जा रहा है जोर : विक्रम कुमार ने कहा कि केवल बच्चों को मुक्त कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें गरीबी और शोषण के दुष्चक्र से बाहर निकालने के लिए उनका पुनर्वास आवश्यक है. इसके लिए बच्चों का स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित करना और उनके परिवारों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर आर्थिक मजबूती प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है. सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक नेतृत्व के कारण ही जमीन पर यह बड़े बदलाव संभव हो पा रहे हैं.

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Shailesh Ambashtha

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