1841 मामलों का निष्पादन

Published at :24 Nov 2013 4:48 AM (IST)
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1841 मामलों का निष्पादन

लोहरदगा : व्यवहार न्यायालय परिसर में पांच दिवसीय मेगा लोक अदालत का समापन किया गया. मौके पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय प्रसाद ने कहा कि मेगा लोक अदालत काफी सफल रहा है और इसमें बड़ी संख्या में वादों का निष्पादन किया गया. लोहरदगा वासियों ने इसका भरपूर लाभ उठाया. इसमें सबों का सहयोग […]

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लोहरदगा : व्यवहार न्यायालय परिसर में पांच दिवसीय मेगा लोक अदालत का समापन किया गया. मौके पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय प्रसाद ने कहा कि मेगा लोक अदालत काफी सफल रहा है और इसमें बड़ी संख्या में वादों का निष्पादन किया गया.

लोहरदगा वासियों ने इसका भरपूर लाभ उठाया. इसमें सबों का सहयोग मिला. प्रशासनिक अधिकारियों, दोनों बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं, पीड़ित पक्षकारों का भी सहयोग मिला. उन्होंने कहा कि मेगा लोक अदालत में निर्णय समझौता के आधार पर कराया जाता है. जिसमें दोनों पक्षों की जीत होती है. इस फैसले से एक पक्ष न तो हारता है और न दूसरा पक्ष जीतता है.

मेगा लोक अदालत में लिये गये निर्णय के विरूद्ध अन्य अदालतों में मुकदमा दर्ज नहीं होता. पीडीजे संजय प्रसाद ने कहा कि समझौता के आधार पर निर्णय के बाद कई पीढ़ी का विवाद सुलझ जाता है. उपायुक्त सुधांशु भूषण बरवार ने कहा कि मेगा लोक अदालत की कार्रवाई में उतरोत्तर वृद्धि हो रही है. इससे विभिन्न मामलों में फंसे लोगों को उचित फैसला समझौता के आधार पर मिलता है.

मेगा लोक अदालत के इस निर्णय से न्यायालय का भार भी कम हो रहा है. एसपी सुनील भास्कर ने कहा कि मेगा लोक अदालत में वैसे आपराधिक मामलों का भी समझौता किया जाता है जो सुलह योग्य हो. लोग छोटे-छोटे मामलों में भी न्यायालय का चक्कर कई वर्षो तक लगाते हैं.

इसमें पैसे तथा समय की बरबादी भी होती है. मेगा लोक अदालत में बगैर कोई खर्च के इसका समाधान हो जाता है. उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि सुलह योग मुकदमा का निबटारा लोक अदालत में अवश्य करायें.

महिलाओं की संख्या थी अधिक : मेगा लोक अदालत में दूर ग्रामीण इलाके से भी लोग अपने वादों के निबटारा के लिए पहुंचे थे. इनमें ग्रामीण महिलाओं की संख्या ज्यादा थी. इन महिलाओं ने समूह बना कर या व्यक्तिगत ऋण गाय-बकरी या अन्य किसी व्यवसाय के लिये बैंक से ऋण लिया था.

वे बैंकों को ऋण वापस नहीं कर पाये थे. ब्याज बढ़ता गया और इसी के लिए समझौते के लिए भी लोक अदालत में आयी थी.

दो बच्चियों को लिया गोद : मेगा लोक अदालत के समापन में पंजाब नेशनल बैंक के द्वारा दो बच्चियों को गोद लेने की घोषणा की गयी. मौके पर पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक ने दोनों बच्चियों की शिक्षा के लिए चेक भी दिया. जिसे पीडीजे, डीसी, एसपी ने प्रदान कया.

संतुष्ट हैं वादी-प्रतिवादी : मेगा लोक अदालत के समापन में कुटूंब न्यायालय में भरण-पोषण वाद संख्या 12/2012 में शकीना खातून जिनकी शादी प्रतिवादी सिंजो निवासी अफरोज अंसारी के साथ हुई थी. पति-पत्नी के साथ विवाद हुआ था और मामला बिगड़ गया था. जिसे मेगा लोक अदालत के माध्यम से सुलह कराया गया. अब दोनों पक्ष पूरी तरह संतुष्ट हैं.

1841 मामलों का निष्पादन : मेगा लोक अदालत में 1841 मामलों का निष्पादन किया गया. जिसमें 93 लाख 60 हजार 761 रुपये की राशि सेटल की गयी. 45 लाख 23 हजार 142 रुपये वसूल किया गया. विभिन्न मामलों में 10 लाख से अधिक का चेक वितरण विभिन्न पक्षकारों को किया गया.

आठ बेंच का गठन : मामलों के निष्पादन के लिए आठ बेंचों का गठन किया गया था. इन बेंचों के माध्यम से बैंक से संबंधित 132, जीआर से संबंधित 20 मामलों, दाखिल खारिज से 118 मामले, टेलीफोन से संबंधित 270 मामलों, बिजली से संबंधित एक मामला, कंपसेशन से संबंधित एक मामला, ट्रैफिक चलान से संबंधित 61 मामला, प्री लिटिगेशन से संबंधित 3 मामलों, वाणिज्य कर से संबंधित 37 मामलों, पीटीशन सेटल्ड से संबंधित 271 मामला, सीआरपीसी की धारा 107 से संबंधित तीन मामला, सेशन ट्रायल केस से संबंधित 5 मामलों, वैवाहिक जीवन से संबंधित दो मामलों, फाइनल फॉर्म से संबंधित मामलों तथा एनआई एक्ट से संबंधित चार मामलों का निष्पादन किया गया.

उपस्थित लोग : समापन समारोह में डीडीसी जगजीत सिंह, एसी बद्री नाथ चौबे, डायरेक्टर डीआरडीए विनोद कुमार चौधरी, डीटीओ ओम प्रकाश शाह, एसडीओ अखौरी शशांक सिन्हा, एलआरडीएसी रवि शंकर विद्यार्थी, कार्यपालक पदाधिकारी मेघना रूबी कच्छप, बीडीओ राहुल वर्मा, संध्या मुंडू, पूनम अनामिका नाग, विजय केरकेट्टा, छवि बाला बारला, बंधन लौग, सीओ महेंद्र कुमार, सीमा कुमारी, बैंक ऑफ इंडिया के चीफ मैनेजर राजेश रंजन, एलडीएम रोपना केरकेट्टा, बैंकों के शाखा प्रबंधक विवेकानंद भगत, विजय कुमार, एकौनी एक्का, शशि कांत शरण, अजय सिन्हा, गोपेश लाल, केसी खलखो, न्यायिक अधिकारियों में डीजे-1 विजय कुमार शर्मा, सीजीएम चंद्रिका राम, मुंशीफ दीपक बरनवाल, एसडीजेएम एसएन सिकदर, विधिक सेवा प्राधिकारी के सचिव एस एन सिंह, न्यायिक दंडाधिकारी सीबी कुमार, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी एसके महराज, अधिवक्ता कृपा शंकर पांडेय, हेमंत कुमार सिन्हा, कुमार चंद्रशेखर, मनोज प्रसाद, देवाशीष कार, राखा साहू, अमेंद्र सिंह, नवल किशोर, राकेश अखौरी, प्रमोद प्रसाद, प्रमोद पुजारी, प्रवीण भारती, एलजीएसएस के सचिव चंद्रपति यादव, प्रवीण कुमार, अनुप कुमार, अजय कुमार, मुन्नी लाल, सुहैल अख्तर आद मौजूद थे.

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