50 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना लटकी

Published at :16 Jul 2013 1:36 PM (IST)
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50 करोड़ रुपये की जलापूर्ति योजना लटकी

* भूमि अधिग्रहण न होने से पड़ रहा असर* पांच ग्रामीण जलापूर्ति योजना धरातल पर नहीं उतर रहीं।। गोपी कुंवर ।।लोहरदगा : जिले में एक ओर जहां पेयजल के लिए हाहाकार मचा है, वहीं दूसरी ओर भूमि उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण लगभग 50 करोड़ रुपये की पांच ग्रामीण जलापूर्ति योजना धरातल पर नहीं […]

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* भूमि अधिग्रहण न होने से पड़ रहा असर
* पांच ग्रामीण जलापूर्ति योजना धरातल पर नहीं उतर रहीं
।। गोपी कुंवर ।।
लोहरदगा : जिले में एक ओर जहां पेयजल के लिए हाहाकार मचा है, वहीं दूसरी ओर भूमि उपलब्ध नहीं कराये जाने के कारण लगभग 50 करोड़ रुपये की पांच ग्रामीण जलापूर्ति योजना धरातल पर नहीं उतर पा रही है. जिले में अकाशी जलापूर्ति योजना, कुडू जलापूर्ति योजना, भंडरा जलापूर्ति योजना, नदिया जलापूर्ति योजना एवं किस्को जलापूर्ति योजना का क्रियान्वयन किया जाना है.

अकाशी ग्रामीण जलापूर्ति योजना एवं कुडू ग्रामीण जलापूर्ति योजना के लिए टेंडर भी हो चुका है. लेकिन अब तक संवेदक को भूमि उपलब्ध नहीं करायी जा सकी है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा लगभग 6 माह पूर्व ही भूमि अधिकरण के लिए अंचलाधिकारी को पत्र लिखा गया था. लेकिन मामला अपर समार्हता के यहां पहुंच कर रुक गया.

अकाशी जलापूर्ति योजना का निर्माण कार्य 13 करोड़ 30 लाख 32 हजार 800 रुपये की लागत से किया जाना है. इसमें ढ़ाई लाख लीटर के दो वाटर टावर, एक फिल्टरेशन प्लांट 2.5 एमएलडी का बनाया जाना है. जलापूर्ति का श्रोत नंदनी डैम होगा. इसके बन जाने से अकाशी, नगडा, मकुंदा, कुम्हरिया, चेरिमा, भीट्ठा, ख्वास अंबवा एवं कचमची के ग्रामीणों को इसका लाभ मिलेगा.

कुडू जलापूर्ति योजना का निर्माण कार्य 10 करोड़ एक लाख 40 हजार रुपये की लागत से किया जाना है. इसमें एक वाटर टावर तीन लाख लीटर का, एक फिल्टरेशन प्लांट 1.4 एमएलडी का बनाया जाना है. इसके अलावा कोयल नदी पर बीयर का निर्माण भी कराये जाने की योजना है. इसका श्रोत कोयल नदी है. इसके बन जाने से कुडू एवं टाटी इलाके के लोगों को लाभ मिलेगा. इसका टेंडर भी हो चुका है. जमीन के अधिग्रहण के लिए स्थल चयन समिति की बैठक एसी की अध्यक्षता में हो गयी है. लेकिन अभी तक जमीन अधिग्रहण नहीं हुआ है.

भंडरा ग्रामीण जलापूर्ति योजना 9 करोड़ 12 लाख 46 हजार रुपये की लागत से बनाया जाना है. इसके बन जाने से भंडरा, सिठियो, बरही के इलाके के ग्रामीणों को सहज पानी उपलब्ध होगा. 14 किलोमीटर पाइप लाइन बिछायी जायेगी और कोयल नदी में बियर भी बनाया जायेगा. जलापूर्ति का श्रोत कोयल नदी होगा. इसका डीपीआर तैयार कर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने मुख्यालय भेज दिया है.

नदिया जलापूर्ति योजना का निर्माण 4 करोड़ 26 लाख 13 हजार रुपये की लागत से किया जाना है. इसके बन जाने से नदिया, हरमू के ग्रामीण लाभान्वित होंगे. इसका श्रोत भी कोयल नदी होगा. किस्को ग्रामीण जलापूर्ति योजना का निर्माण पांच करोड़ 64 लाख 29 हजार रुपये की लागत से कराया जाना है. इसके बन जाने से किस्को एवं परहेपाट के ग्रामीणों को सहज पानी उपलब्ध होगा.

इसके लिए भी डीपीआर तैयार कर मुख्यालय को भेजा जा चुका है. इन इलाकों में पेयजल की घोर किल्लत है. इस क्षेत्र के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं. और अब जब इन योजनाओं का धरातल पर उतारने के लिए टेंडर हो चुका है तो फिर जमीन अधिग्रहण के नाम पर अनावश्यक विलंब किया जा रहा है.

* अब तक भूमि का अधिग्रहण नहीं हुआ
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता शशि भूषण पूरन ने बताया कि विभाग की ओर से अक्टूबर 2012 में ही अंचल अधिकारी को पत्र लिखा गया है. लेकिन अब तक भूमि का अधिग्रहण नहीं हो पाया है. दो जलापूर्ति योजनाओं का टेंडर हो चुका है एवं तीन जलापूर्ति योजना का डीपीआर तैयार कर मुख्यालय में भेजा जा चुका है, लेकिन कोई भी योजना आगे नहीं बढ़ी.

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