आज भी पेशरार में पक्की सड़क नहीं

किस्को-लोहरदगा : पेशरार प्रखंड क्षेत्र आज भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है. इस क्षेत्र के लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है. पेशरार प्रखंड क्षेत्र की दूरी जिला मुख्यालय से लगभग 35 किमी है. क्षेत्र में आने-जाने के लिए पक्की सड़क की व्यवस्था नहीं है. लोग किसी प्रकार पहाड़ों को काट कर बनाये […]
किस्को-लोहरदगा : पेशरार प्रखंड क्षेत्र आज भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है. इस क्षेत्र के लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है. पेशरार प्रखंड क्षेत्र की दूरी जिला मुख्यालय से लगभग 35 किमी है. क्षेत्र में आने-जाने के लिए पक्की सड़क की व्यवस्था नहीं है. लोग किसी प्रकार पहाड़ों को काट कर बनाये गये उबड़-खाबड़ रास्तों में चल कर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं.
क्षेत्र के लोग अधिकांश पैदल या साइकिल से प्रखंड या जिला मुख्यालय बाजार आते-जाते हैं. पेशरार प्रखंड क्षेत्र में कई ऐसे गांव अभी भी हैं जहां मोरमीकरण सड़क तक नहीं है. इस क्षेत्र में सुबह एवं शाम चलने वाली सवारी पिकअप लोगों को शहर या बाजार ले जाती है तथा ले आती है. लोग इसी पिकअप के भरोसे सुबह जाते हैं तथा शाम में आते हैं. कभी-कभार गाड़ी खराब हो जाने से लोगों को और भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इस क्षेत्र से मात्र चार सवारी गाड़ी जो मदनपुर, केरार, पेशरार एवं चंदगो से खुलती है.
वहीं गाड़ी दोबारा शाम में लौटती है. लोग किसी प्रकार इसी वाहन में उपर नीचे बैठ कर अपना गांव आना-जाना करते हैं. वाहनों की कमी के कारण वाहन मालिक मनमानी तरीके से यात्रा ियों से भाड़ा वसूलते हैं. यात्री बताते हैं कि शहर से पेशरार का भाड़ा 40 रुपये प्रति यात्री देना पड़ता है. वाहन में लोग जल्दी घर पहुंचने के चक्कर में सीट की सुविधा नहीं देखते. सीट भर जाने के बाद लोग रेलिंग में तथा बोनट पर बैठक कर यात्रा करते हैं.
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