विकास की रोशनी से दूर होता गांव

सुविधाविहीन गांव में किसी तरह जीवन गुजार रहे 500 ग्रामीण काड़ंग गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल जैसी सुविधा नहीं है जंगल के लाह, महुआ, चिरौंजी व कुसुम बेच कर करते हैं जीवन यापन रायडीह (गुमला) : प्रखंड क्षेत्र के जरजट्टा पंचायत स्थित काड़ंग गांव की 500 आबादी किसी तरह अपना जीवन यापन करने को […]
सुविधाविहीन गांव में किसी तरह जीवन गुजार रहे 500 ग्रामीण
काड़ंग गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल जैसी सुविधा नहीं है
जंगल के लाह, महुआ, चिरौंजी व कुसुम बेच कर करते हैं जीवन यापन
रायडीह (गुमला) : प्रखंड क्षेत्र के जरजट्टा पंचायत स्थित काड़ंग गांव की 500 आबादी किसी तरह अपना जीवन यापन करने को विवश हैं. गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल जैसी सुविधा नहीं है. गांव में सबसे बड़ी समस्या रोजगार की है. रोजगार के अभाव में गांव के दर्जनों लोग पलायन कर चुके हैं और जो बचे हैं, वे जंगल पर आश्रित हैं. गांव के ग्रामीण जंगल से लाह, महुआ, चिरौंजी व कुसुम लाकर बाजार में बेचते हैं, जिससे आमदनी होती है. उसी से परिवार का भरण-पोषण करते हैं.
रायडीह प्रखंड मुख्यालय से गांव की दूरी लगभग 12 किमी तथा जरजट्टा पंचायत की दूरी 10 किमी है. दोनों जगहों पर आने-जाने के लिए अलग-अलग रास्ते हैं. प्रखंड और जिला प्रशासन ने गांव के ग्रामीणों की सुध नहीं ली तो सड़क की समस्या के समाधान के लिए गांव के सभी परिवार के लोगों ने प्रति घर से एक-एक हजार रुपये चंदा कर लसड़ा से काड़ंग तक सड़क बनवायी है. शिक्षा के लिए गांव में एक आरसी प्राथमिक विद्यालय है. लेकिन अभाव के कारण झोपड़ीनुमा मकान पर चलता है, जिसे बरसात के मौसम में चलाना काफी मुश्किल होता है. विद्यालय में मुश्किल से 10 से 12 बच्चे हैं. वहीं स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त करने के लिए गांव केग्रामीणों को सात किमी दूरी तय कर लसड़ा जाना पड़ता है.
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