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हजरत बाबा दुखन शाह (रअ) का 101वां सालाना उर्स संपन्न

Updated at : 16 Jan 2026 6:53 PM (IST)
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हजरत बाबा दुखन शाह (रअ) का 101वां सालाना उर्स संपन्न

लोहरदगा की सरज़मीं पर हजरत बाबा दुखन शाह (रअ) का 101वां सालाना उर्स मुबारक पूरे अकीदत, रूहानियत और भव्यता के साथ संपन्न हुआ

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: आस्था, भाईचारे और देशभक्ति का संगम बाबा दुखन शाह का उर्स एकता और शांति का पैग़ाम देता है: विधायक अनुप सिंह लोहरदगा: लोहरदगा की सरज़मीं पर हजरत बाबा दुखन शाह (रअ) का 101वां सालाना उर्स मुबारक पूरे अकीदत, रूहानियत और भव्यता के साथ संपन्न हुआ. यह आयोजन न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और देशभक्ति का जीवंत संदेश भी देता रहा. उर्स के दूसरे दिन आयोजित महफिल-ए-कव्वाली ने लोहरदगा की फिज़ाओं को मोहब्बत, इंसानियत और अमन-चैन की खुशबू से सराबोर कर दिया. कव्वाली की रूहानी महफिल भव्य कव्वाली मुकाबले का उद्घाटन सांसद सुखदेव भगत, बेरमो विधानसभा के कांग्रेस विधायक अनुप सिंह और अंजुमन इस्लामिया लोहरदगा के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया. सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि “औरों को मुकद्दर से मिला है, मुझे जो भी मिला बाबा तेरे दर से मिला है.” उन्होंने जोर देकर कहा कि बाबा दुखन शाह (रअ) खुदा के वली हैं और उनके दर पर साफ दिल से मांगी गयी दुआ जरूर कबूल होती है. उन्होंने कुरान के ‘इक़रा’ शब्द का उल्लेख करते हुए शिक्षा और इल्म हासिल करने पर बल दिया. – विधायक अनुप सिंह ने कहा कि यह उर्स किसी एक कौम का नहीं, बल्कि एकता, सौहार्द और शांति का पैग़ाम है. उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी भाई-भाई हैं और बाबा के दर पर किसी जाति या धर्म का भेद नहीं होता. कव्वाली मुकाबले ने महफिल को यादगार बना दिया अंजुमन इस्लामिया लोहरदगा एवं उर्स इंतजामिया कमेटी के तत्वावधान में आयोजित कव्वाली मुकाबले में हजारों की संख्या में जायरीन और श्रद्धालु देर रात तक मौजूद रहे. आतिश मुराद (कर्नाटक) और चांद कादरी (दिल्ली) के बीच हुए मुकाबले ने महफिल को यादगार बना दिया. आतिश मुराद ने “भर दे झोली या मोहम्मद”, “अकेला मत समझ मुझे”, “क्योंकि मेरे वर्दी में भारत बोलता है” जैसे कलाम पेश कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया. वहीं चांद कादरी ने “लहू अपने दे दो चमन के लिए”, “जो सरहद पे मुझको शहादत मिले तिरंगा ओढ़ाना कफन के लिए” और “हालातों से क्या घबराना, अल्लाह है” जैसी देशभक्ति और रूहानियत से भरी कव्वालियां सुनाकर महफिल को और भी रूहानी बना दिया. हम्द, नात, ग़ज़ल और शहीदी कव्वाली ने माहौल को और भी असरदार बना दिया. पुलिस की आस्था और सुरक्षा पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिज़वी ने बताया कि बाबा की आस्था सभी पर है और इसी कारण हर वर्ष सबसे पहली चादर पुलिस विभाग की ओर से चढ़ाई जाती है. उन्होंने शांतिपूर्ण आयोजन के लिए पुलिस-प्रशासन की भूमिका की सराहना की. अतिथियों का स्वागत अंजुमन इस्लामिया लोहरदगा के सदर अब्दुल रऊफ अंसारी, सचिव शाहिद अहमद बेलू, नाजिम-ए-आला हाजी अब्दुल जब्बार अंसारी, कोषाध्यक्ष फिरोज शाह, उपाध्यक्ष हाजी नईम खान, सैयद आरिफ हुसैन बबलू, सहसचिव अनवर अंसारी एवं अल्ताफ कुरैशी द्वारा पगड़ीपोशी और शॉल ओढ़ाकर किया गया. इसके बाद उर्स इंतजामिया कमेटी के फारूक कुरैशी, जफर इमाम, वासिफ कय्यूम, सरवर खान, मोजम्मिल अंसारी, नेहाल कुरैशी, यासिन कुरैशी, दानिश अली, अब्दुल कय्यूम खान, सरफुल अंसारी, महबूब अंसारी, अब्दुल कादिर, अली रहमान, प्रवेज सिद्दीकी एवं इरशाद आलम सहित अन्य सदस्यों को बैज लगाकर सम्मानित किया गया. सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश इस आयोजन में बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे. सजीत सिंह बाबू, कुणाल, नेहाल कुरैशी, अनवर अंसारी, सलीम अंसारी बड़े, नेसार अहमद, मो. खलील खान, गुलाम मुर्तजा खलीफा, मो. शमीम खलीफा, हाजी इमरान, नसीम वकील, मोकिम खान, मो. इब्राहिम एजेंट, इरशाद आलम, अब्दुल हनान खान, हाजी तौहिद अंसारी, मो. मेराज, ताबिश आलम, शहनवाज अहमद, माजिद खान, शादाब आलम, रेहान अंसारी, फिरोज कुरैशी, राजू कुरैशी सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

VIKASH NATH is a contributor at Prabhat Khabar.

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