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बेटियों को पैतृक हक देने के फैसले को नहीं मानेगा आदिवासी समाज

Updated at : 12 Aug 2025 9:05 PM (IST)
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बेटियों को पैतृक हक देने के फैसले को नहीं मानेगा आदिवासी समाज

बेटियों को पैतृक हक देने के फैसले को नहीं मानेगा आदिवासी समाज

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लातेहार ़ जिला मुख्यालय के आदिवासी वासाओड़ा में मंगलवार को जिला पड़हा समिति की बैठक राष्ट्रीय स्वयं सेवक देव कुमार धान की उपस्थिति में आयोजित हुई. बैठक में बताया गया कि 16 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने पैतृक हक बेटियों को देने का फैसला सुनाया है, जिसे आदिवासी समाज ने नहीं मानने का निर्णय लिया है. निर्णय के अनुसार पैतृक हक बेटियों को नहीं दिया जायेगा क्योंकि इसका लाभ दूसरे समुदाय के लोग उठा रहे हैं. देव कुमार धान ने कहा कि पैतृक हक किसी भी हाल में बेटियों को नहीं दिये जाने को लेकर आदिवासी समाज पूरी तरह एकजुट है. बैठक में आगामी 2027 की जनगणना में आदिवासी धर्म कोड लिखने और लातेहार जिले में विस्थापन का विरोध करने का निर्णय भी लिया गया. अगली बैठक नौ सितंबर को होगी, जिसमें जिले भर से आदिवासी समुदाय के लोग शामिल होंगे और एक समन्वय समिति का गठन किया जायेगा. देव कुमार धान ने कहा कि आदिवासी समाज को अपने हक और अधिकार के लिए एकजुट होना होगा. बैठक में चमरू उरांव, रंजय उरांव, रामदेव उरांव, सिकंदर उरांव, सहादेव उरांव, दिलेशर उरांव, जितराम उरांव, सूर्यनारायण उरांव, धनलाल उरांव, राजू उरांव, लक्ष्मण उरांव, बिरसा मुंडा, जयलाल उरांव, सबिंद्र उरांव, विनोद उरांव, छोटू उरांव, सरोज उरांव, कुलदेव भगत, तेतरा उरांव, सीता कुमारी, चैतु उरांव, रामलाल उरांव, राजीव उरांव, पहलू उरांव, केदार सिंह खरवार, प्रदीप सिंह खरवार, लालबिहारी उरांव, रोशन कुमार भगत समेत कई लोग उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH AMBASHTHA

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