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जी रामजी कानून के खिलाफ मुखर हुए जनप्रतिनिधि, आंदोलन का ऐलान

Updated at : 11 Jan 2026 10:36 PM (IST)
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जी रामजी कानून के खिलाफ मुखर हुए जनप्रतिनिधि, आंदोलन का ऐलान

जी रामजी कानून के खिलाफ मुखर हुए जनप्रतिनिधि, आंदोलन का ऐलान

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महुआडांड़़ प्रखंड के रेगाई पंचायत भवन में रविवार को क्षेत्र के विभिन्न ग्राम पंचायतों के मुखिया, ग्राम प्रधान एवं वार्ड सदस्यों की बैठक हुई. इसमें जी रामजी कानून 2025 के खिलाफ एकजुट होकर खुला विरोध दर्ज किया गया. बैठक में सर्वसम्मति से इस कानून को मजदूर-विरोधी बताते हुए इसके खिलाफ जनआंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया गया. मौके पर झारखंड नरेगा वॉच के राज्य संयोजक जेम्स हेरेंज ने कहा कि विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) जिसे जी रामजी कानून कहा जा रहा है, को 18 दिसंबर 2025 को बिना किसी व्यापक सार्वजनिक विमर्श के ही संसद से पारित कर दिया गया. यह कानून देश के लगभग 26 करोड़ ग्रामीण श्रमिकों की आजीविका और जीवन पर सीधा प्रभाव डालता है. उन्होंने कहा कि यह कानून मनरेगा अधिनियम 2005 की मूल भावना के विपरीत है. मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को काम का कानूनी अधिकार प्राप्त था, वहीं नये कानून में काम की उपलब्धता केंद्र सरकार के बजट और नीतिगत फैसलों पर निर्भर होगी. इससे जरूरतमंद मजदूरों को समय पर काम और मजदूरी मिलने की गारंटी कमजोर हो जायेगी. बैठक में गढ़बुढनी पंचायत की मुखिया रेणु तिग्गा, रेगाईं मुखिया कमला किंडो, चंपा मुखिया सुषमा कुजूर, अंबाटोली की रोशनी कुजूर, चटकपुर की रेखा नगेसिया, महुआडाड़ की प्रमिला मिंज, ओरसा की अमृता देवी, सोहर की मगदली टोप्पो, दुरुप की ऊषा खलखो, नरेगा वॉच से अफसाना खातून सहित कई वार्ड सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH AMBASHTHA

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