हाथी के शव को पीटीआर प्रबंधन ने दफनाया

Updated at : 02 Mar 2025 8:30 PM (IST)
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हाथी के शव को पीटीआर प्रबंधन ने दफनाया

पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क में दो नर हाथियों के बीच हुई लड़ाई के पांच दिन बाद एक घायल हाथी की मौत हो गयी थी. शनिवार को हाथी का पोस्टमार्टम किया गया.

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बेतला. पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क में दो नर हाथियों के बीच हुई लड़ाई के पांच दिन बाद एक घायल हाथी की मौत हो गयी थी. शनिवार को हाथी का पोस्टमार्टम किया गया. वहीं घटनास्थल के पास ही उसे दफना दिया गया. शव दफनाने से पूर्व हाथी के दोनों दांतों को काटकर निकाला गया, जिसका वजन करीब 45 किलोग्राम है. हाथी के दांत को पीटीआर के स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा गया है. वहीं बेसरा को जांच के लिए वेटरनरी कॉलेज, रांची भेजा गया है. घटना की सूचना एनटीसीए, भारत सरकार को भेज दी गयी है. पोस्टमार्टम के दौरान पाया गया कि मृत हाथी के पेट व सिर सहित कई जगहों पर हाथी दांत के गड्ढे बने हुए थे. हालांकि घायल होने के बाद जैसे ही जानकारी पीटीआर प्रबंधन को मिली थी, हाथी का इलाज शुरू हो गया था. पीटीआर के क्षेत्र निदेशक एसआर नटेश, डिप्टी डायरेक्टर प्रजेशकांत जेना, रेंजर उमेश कुमार दुबे सहित कई वरीय पदाधिकारी भी वहां मौजूद थे. कर्नाटक के मशहूर पशु चिकित्सक डॉ मनोहरण और गुवाहाटी के डॉ केके शर्मा के दिशा-निर्देश पर स्थानीय चिकित्सक डॉ फरहत जब्बार और डॉ सुनील कुमार ने हाथी का इलाज किया था.

ट्रैंक्विलाइजर गन से दिया गया था इंजेक्शन:

लड़ाई में घायल हाथी को ट्रैंक्विलाइजर गन से इंजेक्शन दिया गया था. डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने इसका प्रयोग किया था. ज्ञात हो कि ट्रैंक्विलाइजर गन से खतरनाक जानवरों को बेहोश किया जाता है. इस गन से जानवरों को बिना नुकसान पहुंचाये अस्थायी रूप से बेहोश या इलाज दूर रहकर किया जा सकता है.

एक दांत वाले हाथी ने दो दांत वाले हाथी को किया था परास्त:

बेतला नेशनल पार्क में जिन दो हाथियों के बीच लड़ाई हुई थी उनमें एक दो दांतवाला और एक हाती एक दांत वाला था. जिस हाथी की मौत हुई, वह दो दांत वाला था. उसकी उम्र करीब 50 वर्ष थी. हमले के बाद एक दांतवाले हाथी को कोई नुकसान नहीं होने की सूचना है. ज्ञात हो कि दोनों हाथियों के बीच दो घंटे तक भिड़ंत हुई थी. इसे पर्यटकों ने भी देखा था और उसकी वीडियो बनायी थी.

क्या कहते हैं डिप्टी डायरेक्टर:

पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने कहा कि हाथियों की आपसी संघर्ष प्राकृतिक है. सभी जंगली जानवर वर्चस्व को लेकर आपस में लड़ाई करते हैं. खासकर दो नर जंगली जानवरों में संघर्ष होने का मुख्य कारण मादा जंगली जानवर ही होती हैं.

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