पलामू टाइगर रिजर्व में 14 घंटे चली वाटरहोल गणना, पानी पीने आने वाले वन्यजीवों की हुई मैपिंग

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Lohardaga News

पलामू टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की गणना करते लोग. फोटो: प्रभात खबर

Latehar News: पलामू टाइगर रिजर्व में 14 घंटे तक चले वाटरहोल गणना अभियान के दौरान वन्यजीवों की गतिविधियों की मैपिंग की गई. हाथी, तेंदुआ, गौर, सांभर और भालू समेत कई प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज हुई. प्राप्त आंकड़े भविष्य में जलस्रोत प्रबंधन और एंटी-पोचिंग रणनीति को मजबूत बनाने में सहायक होंगे. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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बेतला से संतोष कुमार की रिपोर्ट

Latehar News: पलामू टाइगर रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्रों में एक दिवसीय वाटरहोल गणना 2026 का अभ्यास सफलतापूर्वक पूरा हो गया है.भीषण गर्मी के इस मौसम में रिजर्व के भीतर स्थित सभी प्राकृतिक और कृत्रिम जलस्रोतों पर पानी पीने आने वाले वन्यजीवों की सटीक मैपिंग के लिए यह विशेष अभियान चलाया गया. इस वृहद् गणना अभ्यास की सबसे बड़ी ताकत अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों और प्रकृतिप्रेमी स्वयंसेवकों की अनूठी जनभागीदारी रही.

कैमफ्लाज तकनीक और वॉचटावर से वन्यजीवों की निगरानी

लगातार 14 घंटे तक चले इस चुनौतीपूर्ण अभियान में वन्यजीवों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया. गणना टीमों को बिना विचलित किये निगरानी करने के लिए मचानों (वॉचटावर) और छलावरण (कैमफ्लाज) तकनीकों पर तैनात किया गया था. प्रत्येक वाटरहोल पर मौजूद वन कर्मियों, ट्रैकर्स और स्वयंसेवकों को एक विशेष डेटा शीट दी गयी थी. इस वैज्ञानिक डेटा शीट में वन्यजीवों के आगमन का समय, उनकी प्रजाति, नर-मादा व शावकों की संख्या और जलस्रोतों के जल स्तर की सटीक जानकारी दर्ज की गयी है. प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान हाथी, तेंदुआ, गौर (बिसन), चीतल, सांभर, कोटरा, भालू और सियार जैसे महत्वपूर्ण स्तनधारी जीवों की भारी सक्रियता रिकॉर्ड की गयी है.

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डेटा से तैयार होगी भविष्य की रणनीति

पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना के अनुसार, इस गणना से प्राप्त आंकड़े वन्यजीवों की मौसमी उपस्थिति और आबादी का एक व्यावहारिक अनुमान प्रदान करते हैं.एकत्रित की गयी डेटा शीट के वैज्ञानिक विश्लेषण से यह समझने में मदद मिलेगी कि गर्मी के दिनों में कौन से वाटरहोल्स वन्यजीवों के लिए सबसे अधिक जीवनदायी साबित हो रहे हैं. इस निष्कर्ष का उपयोग भविष्य में बेहतर वाटरहोल प्रबंधन, कृत्रिम जल आपूर्ति और एंटी-पोचिंग (शिकार विरोधी) तंत्र को मजबूत करने के लिए किया जायेगा. पीटीआर प्रशासन ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपने समर्पित फ्रंटलाइन स्टाफ और सभी स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया है.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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