लातेहार में 1833 से जारी है रथ यात्रा का इतिहास, इस बार मौसीबाड़ी की यात्रा होगी बेहद खास

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पूजा करते यजमान

लातेहार में 192 साल पुरानी ऐतिहासिक रथ यात्रा निकालने की शुरुआत 1833 में हुई थी. इसके तहत इस बार 15 जुलाई को नेत्रदान और 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की नगर भ्रमण यात्रा निकलेगी.

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लातेहार से चंद्रप्रकाश सिंह की रिपोर्ट

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लातेहार : लातेहार शहर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का इतिहास बेहद गौरवशाली और करीब 192 साल पुराना है. यहां रथ यात्रा की ऐतिहासिक शुरुआत अंग्रेजों के जमाने में वर्ष 1833 में हुई थी. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, लातेहार में पहली बार रथ यात्रा शहर के बाजारटांड़ स्थित अति प्राचीन शिव मंदिर से निकाली गई थी. मंदिर के पुजारी मनोज दास शर्मा ने बताया कि उनके पूर्वज महंत पूरनदास जी महाराज ने इस पावन परंपरा की नींव रखी थी. जिस बाजारटांड़ शिव मंदिर से यह परंपरा शुरू हुई, वह खुद दो सौ साल से भी ज्यादा पुराना और ऐतिहासिक है.

वर्ष 1995 से ठाकुरबाड़ी मंदिर से निकल रही भव्य यात्रा

वक्त के साथ इस ऐतिहासिक आयोजन का केंद्र बदला और वर्ष 1995 से यह रथ यात्रा शहर के बीचोबीच स्थित प्रसिद्ध ठाकुरबाड़ी मंदिर से निकाली जा रही है. वर्तमान में मंदिर समिति के संरक्षक योगेश्वर प्रसाद अपनी धर्मपत्नी के साथ और महंत दिलीप उपाध्याय के सानिध्य में भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भाई बलराम की पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं. सनातन परंपरा में यह दृढ़ मान्यता है कि रथ पर सवार भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं को हजार यज्ञों के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

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15 जुलाई को नेत्रदान और 16 को मौसीबाड़ी प्रस्थान

इस वर्ष के आयोजनों को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं. शहर के मेन रोड स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर में आगामी 15 जुलाई को भगवान जगन्नाथ का 'नेत्रदान पूजा' संपन्न कराया जाएगा. 15 दिनों के कड़े एकांतवास (अनासर काल) के बाद जब भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्रा भक्तों को दर्शन देंगे, तो श्रद्धालु मंदिर में भक्ति भाव से उनका स्वागत करेंगे. इसके अगले दिन यानी 16 जुलाई को दोपहर 3.00 बजे भगवान की भव्य रथ यात्रा नगर भ्रमण के लिए निकलेगी. पूरे शहर का भ्रमण करते हुए भगवान का रथ अपनी मौसीबाड़ी पहुंचेगा. इस बार की रथ यात्रा बेहद खास होने वाली है क्योंकि आनंद मोहन सेवा संस्थान द्वारा रथ को बेहद आकर्षक रूप से सजाने का कार्य किया जा रहा है. साथ ही, संस्था द्वारा पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन के लिए आधुनिक ध्वनि विस्तारक यंत्रों (साउंड सिस्टम) की व्यवस्था की गई है. इस वर्ष की रथ यात्रा का मुख्य आकर्षण अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) की टीम होगी. इस्कॉन संस्थान के कीर्तन मंडली द्वारा पूरे नगर भ्रमण के दौरान हरे रामा-हरे कृष्णा के महामंत्र से पूरे लातेहार को भक्तिमय किया जाएगा. मंदिर समिति ने सभी श्रद्धालुओं से इस भव्य रथ यात्रा में बढ़-चढ़कर शामिल होने की अपील की है.

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