लातेहार के किसान का 'सुपर जुगाड़', बैल और ट्रैक्टर नहीं मिले, तो मोटरसाइकिल से ही जोत डाला पूरा खेत

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मोटरसाइकिल के जरिये खेती करते किसान रवींद्र मिस्त्री

मोटरसाइकिल के जरिये खेती करते किसान रवींद्र मिस्त्री

खेती के पीक सीजन में जब ट्रैक्टर-बैल नहीं मिले, तो लातेहार के रविंद्र मिस्त्री ने एक अनोखा देसी जुगाड़ अपनाया. उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल को ही खेत जोतने का साधन बना लिया. जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी.

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लातेहार: कहते हैं कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है. इस बात को लातेहार जिले के हेरहंज प्रखंड अंतर्गत आराहारा गांव के एक छोटे से किसान रविंद्र मिस्त्री ने सच कर दिखाया है. खेती के इस पीक सीजन में जब उन्हें खेत तैयार करने के लिए न तो ट्रैक्टर मिला और न ही हर-बैल की व्यवस्था हो सकी, तो उन्होंने हिम्मत हारने के बजाय एक ऐसा अनोखा देशी जुगाड़ अपनाया जिसने पूरे इलाके के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. रविंद्र ने अपनी मोटरसाइकिल को ही खेती का साधन बना लिया और उसी की मदद से पूरे खेत को समतल (पाटने) कर डाला.

मकई की बुआई के बाद बाइक से बराबर किया खेत

खरीफ फसलों की बुआई के इस मौसम में रविंद्र मिस्त्री ने अपने खेत में मकई (मक्का) की बुआई की थी. बीज डालने के बाद खेत को समतल करना बेहद जरूरी था ताकि बीज मिट्टी में अच्छी तरह दब सकें. गांव में कृषि संसाधनों की भारी कमी के कारण उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल के पीछे लकड़ी का पाटा (हेंगा) बांधा और बाइक चलाकर पूरे खेत को एक समान कर दिया. किसान ने बताया कि इस वर्ष क्षेत्र में उम्मीद के मुताबिक पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है, जिससे सूखे जैसी गंभीर स्थिति बनी हुई है. इसके बावजूद अच्छी बारिश की आस में उन्होंने हार नहीं मानी और खेती का काम जारी रखा है.

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संसाधनों की कमी से जूझ रहे किसान

इस अनोखे प्रयोग को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि खेती के ऐन वक्त पर कृषि उपकरणों और पारंपरिक साधनों (जैसे बैल) की कमी हमेशा से छोटे किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती रही है. ऐसे में भाड़े पर ट्रैक्टर न मिलने पर किसानों की फसल पिछड़ जाती है. रविंद्र मिस्त्री के इस कदम की सराहना करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि यह देशी जुगाड़ यह साबित करता है कि अगर मन में मेहनत, लगन और कुछ नया करने का जज्बा हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी किसान अपनी फसलों को उगाने का रास्ता निकाल ही लेते हैं. रविंद्र का यह साहसिक प्रयास अब पूरे प्रखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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