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चंदवा में देर रात ट्रेन की चपेट में आया हाथी का बच्चा, हो गई मौत

Updated at : 17 Feb 2026 12:41 PM (IST)
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चंदवा में देर रात ट्रेन की चपेट में आया हाथी का बच्चा, हो गई मौत

बरकाकाना-बरवाडीह रेलखंड पर महुआमिलान और निद्रा रेलवे स्टेशन के बीच डाउन लाइन पर ट्रेन दुर्घटना का शिकार हुआ हाथी का बच्चा. फोटो: प्रभात खबर

Chandwa Elephant Death: चंदवा में बरकाकाना-बरवाडीह रेलखंड पर ट्रेन की चपेट में आने से हाथी के बच्चे की मौत हो गई. झुंड के आक्रोश के कारण घंटों तक राहत कार्य प्रभावित रहा. अप और डाउन लाइन पर रेल परिचालन बाधित हुआ. वन विभाग ने शव का अंत परीक्षण कराया और जांच शुरू की. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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Chandwa Elephant Death: झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा में सोमवार देर शाम एक दर्दनाक हादसे में हाथी के बच्चे की ट्रेन से कटकर मौत हो गई. घटना लातेहार जिले के बरकाकाना-बरवाडीह रेलखंड पर महुआमिलान और निद्रा रेलवे स्टेशन के बीच डाउन लाइन पर हुई. हादसा चंदवा थाना क्षेत्र के पुतरी टोला गांव के पास हुआ, जहां हाथियों का झुंड रेलवे ट्रैक पार कर रहा था.

झुंड के साथ पार कर रहा था रेलवे ट्रैक

मिली जानकारी के अनुसार, हाथियों का एक झुंड जंगल से निकलकर रेलवे लाइन पार कर रहा था. इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में एक हाथी का बच्चा आ गया. टक्कर इतनी जोरदार थी कि हाथी का बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया. घटना के तुरंत बाद ट्रेन आगे बढ़ गई, जबकि घायल हाथी ट्रैक के किनारे तड़पता रहा. घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य शुरू करने का प्रयास किया. हालांकि स्थिति बेहद संवेदनशील थी, क्योंकि झुंड के अन्य हाथी वहीं आसपास डटे हुए थे.

आक्रोशित झुंड ने नहीं जाने दिया पास

हादसे के बाद जंगली हाथियों का झुंड रेलवे लाइन के किनारे ही डेरा जमाए रहा. बताया गया कि झुंड काफी आक्रोशित था और किसी को भी घायल हाथी के पास नहीं जाने दे रहा था. हाथी की मां लगातार उसके पास मौजूद रही, जिससे स्थिति और भी भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण हो गई. वन कर्मी, ग्रामीण और पशु चिकित्सक मौके पर मौजूद थे, लेकिन हाथियों के आक्रामक व्यवहार के कारण कोई भी नजदीक नहीं जा सका. वन विभाग और रेलवे अधिकारियों को स्थिति संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी.

रेल परिचालन पूरी तरह ठप

घटना के बाद अप और डाउन दोनों रेल लाइनों पर परिचालन पूरी तरह ठप हो गया. यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. रेलवे और वन विभाग के अधिकारी पूरी रात घटनास्थल पर डटे रहे. रेंजर नंदकुमार महतो और डीएफओ प्रवेश अग्रवाल देर रात चंदवा पहुंचे और स्थिति की समीक्षा की. रेलवे अधिकारियों की पहल पर एक लाइट इंजन की व्यवस्था की गई, जिसके माध्यम से अधिकारी घटनास्थल के करीब तक पहुंचे और हालात का जायजा लिया.

मां के ममत्व ने बढ़ाई चिंता

घायल हाथी के पास उसकी मां लगातार मौजूद रही. वह अपने बच्चे के आसपास घूमती रही और किसी को पास नहीं आने दे रही थी. यह दृश्य बेहद मार्मिक था. अधिकारी और वनकर्मी भी इस ममत्व को देखकर भावुक हो गए. लगातार प्रयासों के बावजूद हाथी के बच्चे की हालत बिगड़ती गई. आधी रात के बाद गंभीर रूप से घायल हाथी ने दम तोड़ दिया.

मंगलवार सुबह पोस्टमार्टम की तैयारी

मंगलवार सुबह वन विभाग की टीम दोबारा घटनास्थल पर पहुंची. हाथी के शव के अंत परीक्षण (पोस्टमार्टम) की तैयारी शुरू की गई. अधिकारियों ने बताया कि घटना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

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कई घंटों बाद सामान्य हुआ परिचालन

इस हादसे के कारण अप रेलवे लाइन पर लगभग सात घंटे और डाउन लाइन पर करीब 12 घंटे तक रेल परिचालन बाधित रहा. मंगलवार को स्थिति सामान्य होने के बाद ट्रेनों का संचालन फिर से शुरू किया गया. यह घटना एक बार फिर रेलवे ट्रैक और वन्यजीवों के बीच टकराव की गंभीर समस्या को उजागर करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के पारंपरिक मार्गों की पहचान कर सुरक्षा उपायों को मजबूत करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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