सुनील कुमार
लातेहार : रांची मेदिनीनगर राष्ट्रीय उच्च पथ 75 पर परिचालन कभी भी ठप हो सकता है. इस पथ पर स्थित बाजारटांड़ पुल एवं झरिया पुल पर कभी भी हादसा हो सकता है. उक्त पुलों पर काम की गति इतनी धीमी है कि छह महीने में खुदाई का काम भी पूरा नहीं हुआ है. सबसे बदतर स्थित तो जायत्री नदी पर स्थित बाजारटांड़ पुल की है.
यहां पिछले फरवरी माह से खुदाई का काम किया जा रहा है, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है. जायत्री नदी पहाड़ी नदी है जिसमें तेज उफान के साथ बाढ़ आती है. जो कभी भी डायवर्सन को बहा सकती है. एक तो एनएच के मानक के अनुसार न तो कहीं डायवर्सन बनाया गया है और न तो पानी निकलने की कोई मुक्कमल व्यवस्था ही की गयी है. बिना किसी प्लानिंग के पुल तोड़ कर एनएच के पदाधिकारी चुप बैठे हैं.
उधर, सड़क व्यवस्था को लेकर उपायुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता लगातार बैठक कर कई दिशा निर्देश जारी कर रहे हैं. एनएच के अधिकारियों से लगातार बात कर रहे हैं, नाराजगी भी व्यक्त कर रहे हैं. बावजूद इसके एनएच के अधिकारियों के कानों पर जू नहीं रेंग रही है. बाजारटांड़ में डायवर्सन इस प्रकार बनाया गया है कि अगर जायत्री नदी में पानी उफान पर आया तो बाजारटांड़ स्थित प्राचीन शिव मंदिर क्षतिग्रस्त हो सकता है.
ऐसी ही स्थित होटवाग स्थित बड़का पुल की है जिसके स्तंभों में दरार आ गयी है. सूचना के बावजूद भी एनएच के अधिकारी न तो उसकी मरम्मत करा रहे हैं और ना ही इसकी वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है बड़का नदी पर पानी काफी उफान पर रहता है जो कभी भी खनहर रहे स्तंभों बहा कर ले जा सकती है.
