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सैनिकों की बहादुरी की खुली गाथा है विजय दिवस

Updated at : 16 Dec 2025 9:13 PM (IST)
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सैनिकों की बहादुरी की खुली गाथा है विजय दिवस

कैलाश राय सरस्वती विद्या मंदिर में मना विजय दिवस

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कैलाश राय सरस्वती विद्या मंदिर में मना विजय दिवस कोडरमा. कैलाश राय सरस्वती विद्या मंदिर में मंगलवार को विजय दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. प्राचार्य आनंद मोहन व अवकाश प्राप्त सैनिक दशरथ यादव व रामजी कुमार यादव ने कार्यक्रम की शुरुआत की. अतिथियों का परिचय आचार्य प्रदीप कुमार ने कराया. मौके पर अवकाश प्राप्त सैनिक दशरथ यादव व रामजी यादव ने आज के दिन को भारत के इतिहास का सबसे गौरवशाली दिन बताया. इस दौरान 16 दिसंबर 1971 को पूर्वी पाकिस्तान की आजादी में अपने बहादुर जवानों के बलिदान को याद किया गया. साथ ही पाकिस्तानी जनरल नियाजी का 93000 सैनिकों के साथ किये गये आत्मसमर्पण के बारे में भी बताया गया. प्राचार्य आनंद मोहन ने कहा कि विजय दिवस हमारे सैनिकों की बहादुरी की खुली गाथा है, जिसे आज पूरा विश्व जानता है. हमारी सैन्य शक्ति उस समय भी पाकिस्तान को धूल चटाने के लिए काफी थी. आज की बात तो दूसरी ही है. उन्होंने जगजीत सिंह अरोड़ा की बहादुरी की गाथा को प्रस्तुत किया. कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया. इस अवसर पर आचार्य प्रदीप कुमार, रामानुज पांडेय, विजय मिश्रा, उमाशंकर कुमार, नीरज कुमार सिंह, चंद्रशेखर कुमार, प्रणव प्रभास, पवन कुमार शर्मा, कुमार मुरलीधर, विजय कुमार तिवारी, मुन्ना सिंह, धीरज कुमार पांडेय, वीरेंद्र कुमार मिश्रा, दीपक कुमार विश्वकर्मा, प्रभात सौरभ, सुनील कुमार, जितेश महतो, शर्मिष्ठा शाहा, सोनी कुमारी, अर्चना सिन्हा, रिमझिम कुमारी, मोनिका कुमारी व अन्य मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DEEPESH KUMAR

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