शबद-कीर्तन से निहाल हुए सिख संगत, हर ओर उत्साह
Published by : ANUJ SINGH Updated At : 25 Nov 2025 8:56 PM
गुरु तेग बहादुर जी के 350 वें शहीदी पर्व पर मंगलवार को गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा में भव्य दीवान सजाया गया.
झुमरीतिलैया. सिखों के नौवें गुरु, हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350 वें शहीदी पर्व पर मंगलवार को गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा में भव्य दीवान सजाया गया. इस कार्यक्रम में सिख संगत ने उत्साह के साथ भाग लिया. वहीं पटना साहिब से आये प्रसिद्ध रागी सरबजीत सिंह ने शबद-कीर्तन से सिख संगत को निहाल किया. गुरु महाराज की शिक्षा का संदेश देते हुये उन्होंने सभी को सत्य, त्याग और भाईचारे के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी. दोपहर 2:30 बजे दीवान की समाप्ति के उपरांत लंगर का आयोजन हुआ. इधर, स्त्री संगत द्वारा निरंतर किया जा रहा सहज पाठ शाम 4:45 बजे पूर्ण हुआ. सिख समाज के लोगों ने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी का जन्म 21 अप्रैल 1621 को अमृतसर में गुरु हरगोबिंद जी के घर हुआ था. बचपन में उनका नाम त्यागमल रखा गया, जो उनके त्यागी स्वभाव का प्रतीक था. 1665 में उन्होंने शिवालिक पर्वत श्रेणी की तलहटी में आनंदपुर साहिब की स्थापना कर सिख इतिहास को नयी दिशा दी. मुगल शासन के दौर में जब धार्मिक स्वतंत्रता खतरे में थी, तब कश्मीरी पंडितों के धर्म की रक्षा हेतु उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी. 24 नवंबर 1675 को दिल्ली में उनकी शहादत ने पूरे देश को मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के महत्व का संदेश दिया. उपस्थित संगत ने उनके बलिदान को स्मरण करते हुए देश में सद्भाव, एकता और शांति की कामना की. कार्यक्रम के सफल संचालन में गुरुद्वारा प्रबंधन समिति और सेवादारों का विशेष योगदान रहा.
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