भौतिकतावादी जीवन शैली से बढ़ रहा डिप्रेशन

Updated at : 08 Apr 2017 8:31 AM (IST)
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भौतिकतावादी जीवन शैली से बढ़ रहा डिप्रेशन

कोडरमा बाजार : विश्व स्वास्थ्य दिवस पर शुक्रवार को सदर अस्पताल में आइएमए व जिला स्वास्थ्य समिति के संयुक्त तत्वावधान में डिप्रेशन-लेट्स टाक विषय पर कार्यशाला लगायी गयी. मौके पर सीएस डाॅ बीपी चौरसिया ने डिप्रेशन के विभिन्न कारणों व उसके निदान के बारे में जानकारी दी. कहा कि भौतिकतावादी जीवनशैली और अत्यधिक अपेक्षाओं के […]

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कोडरमा बाजार : विश्व स्वास्थ्य दिवस पर शुक्रवार को सदर अस्पताल में आइएमए व जिला स्वास्थ्य समिति के संयुक्त तत्वावधान में डिप्रेशन-लेट्स टाक विषय पर कार्यशाला लगायी गयी. मौके पर सीएस डाॅ बीपी चौरसिया ने डिप्रेशन के विभिन्न कारणों व उसके निदान के बारे में जानकारी दी.
कहा कि भौतिकतावादी जीवनशैली और अत्यधिक अपेक्षाओं के चलते लोग इससे अधिक ग्रसित हो रहे हैं. युवा वर्ग इससे अधिक प्रभावित है. उन्होंने चिकित्सकों से डिप्रेशन के मरीजों को उचित दवा के साथ-साथ काउंसलिंग करने पर भी बल दिया. आइएमए के सचिव डाॅ रमण कुमार ने पूरे विश्व में डिप्रेशन के मरीजों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि यह डायबिटीज व हृदय रोग का एक महत्वपूर्ण कारण है.
डिप्रेशन के बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति दुखी रहता है तथा जो कार्य एक सामान्य व्यक्ति को आनंदित करती है, प्रसन्नता देती है, तो ऐसे कार्यों से उसकी रुचि समाप्त हो जाती है और वह अपने दैनिक कार्यों को भी ठीक ढंग से नहीं कर पाता है.
यदि यह स्थिति लगातार 14 दिनों तक बनी रहती है, तो इसका मतलब है कि वह व्यक्ति डिप्रेशन का मरीज हो चुका है. कहा कि ऐसे व्यक्ति से जुड़े हुए लोग चाहे वह परिवार के सदस्य हो या सहकर्मी या मित्र को उनकी सहायता के लिए तत्पर रहना चाहिए. डिप्रेशन के अन्य लक्षणों में चिड़चिड़ापन, नाकाबिल होने की भावना, बेचैन रहना, अच्छी नींद नहीं आना, अधिक सोना, आत्महत्या का ख्याल आना, शरीर के विभिन्न हिस्सों में बिना किसी कारण के दर्द अनुभव करना, खान-पान के व्यवहार में बदलाव आना आदि शामिल हैं.
डाॅ गोपाल प्रसाद ने कहा कि सही इलाज और काउंसलिंग से ऐसे मरीजों को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है. इसके लिए चिकित्सक सलाह के अलावा परिवार व समाज की भूमिका भी बहुत अहम है. डाॅ एसके झा ने डिप्रेशन के इलाज में योग, प्राणायम व व्यायाम की महत्ता पर प्रकाश डाला. कार्यशाला को डाॅ आरजेपी सिंह, डाॅ मनोज कुमार, डाॅ एबी प्रसाद, डाॅ आरएल रजक, डाॅ आशीष कुमार व सहायक अजित कुमार ने भी संबोधित किया. मौके पर डाॅ विनोद कुमार, डाॅ रंजन कुमार, डाॅ अमरेंद्र कुमार, डाॅ शरद कुमार, डाॅ भारती सिन्हा, डाॅ भावना, राजीव रंजन, जमाल, सागर, अर्चना, जीवन कुमार, शाही, ग्रेस तिर्की, संजू, प्रकाश, चंदन, सुमन, अरुण, महेश मौजूद थे.
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