गैर मजरूआ खास जमीन की खरीद-बिक्री पर से रोक हटे

Updated at : 17 Mar 2016 7:25 AM (IST)
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गैर मजरूआ खास जमीन की खरीद-बिक्री पर से रोक हटे

पूर्व मंत्री ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रखी मांग, सौंपा ज्ञापन कहा, हजारों लोग प्रभावित, उच्च स्तरीय जांच आज तक नहीं हुई कोडरमा. जिले में गैरमजरूआ खास जमीन की खरीद बिक्री, दाखिल खारिज व मालगुजारी रसीद निर्गत करने पर लगी रोक को हटाने की मांग पूर्व मंत्री सह राजद नेता अन्नपूर्णा देवी ने राज्य सरकार […]

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पूर्व मंत्री ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रखी मांग, सौंपा ज्ञापन
कहा, हजारों लोग प्रभावित, उच्च स्तरीय जांच आज तक नहीं हुई
कोडरमा. जिले में गैरमजरूआ खास जमीन की खरीद बिक्री, दाखिल खारिज व मालगुजारी रसीद निर्गत करने पर लगी रोक को हटाने की मांग पूर्व मंत्री सह राजद नेता अन्नपूर्णा देवी ने राज्य सरकार से की है.
इस संबंध में उन्होंने 15 मार्च को प्रदेश के मुख्यमंत्री रघुवर दास से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में पूर्व मंत्री ने कहा है कि वर्ष 2011 में तत्कालीन उपायुक्त शिवशंकर तिवारी ने अपने कार्यालय आदेश 2620 दिनांक 29-9-2011 के जरिये करीब 34 हजार एकड़ गैर मजरूआ खास जमीन की खरीद-बिक्री, दाखिल खारिज, मालगुजारी रसीद निर्गत करने व बैंक लोन पर रोक लगा दी थी. पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की अनुशंसा सरकार से की गयी थी, लेकिन पांच वर्ष बीतने के बाद भी मामले की जांच नहीं हुई. उन्होंने कहा है कि जिला स्तर से भी ऐसे जमीन के दखलकारों की बंदोबस्ती रद्द करने की दिशा में भी कोई कार्रवाई नहीं की गयी. केवल मामला उलझा कर रखा गया.
ऐसे में हजारों रैयत व दखलकार प्रभावित हो रहे हैं, जिनकी जमीन पूर्व जमींदारों द्वारा विधिवत रिटर्न दाखिल कर ली गयी है. वह अंचल कार्यालय में जमा भी है. यही नहीं हजारों लोगों ने वर्ष 1952 में जमींदारी उन्मूलन से पहले रजिस्टर्ड डीड के माध्यम से जमीन खरीदी है व जिसका दाखिल खारिज मालगुजारी रसीद है, उस पर रोक लगायी गयी है. इस मामले में कुछ लोग हाई कोर्ट गये, तो कोर्ट ने इसे इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट की धाराओं के प्रतिकूल बताते हुए जमीन का केवाला करने का आदेश दिया.
सबसे पहले तारकेश्वर प्रसाद बनाम राज्य का मामला है. सरकार ने दोबारा अपील की, पर कोर्ट ने फैसले को बरकरार रखा. इसके बाद कुछ लोग हाईकोर्ट गये, लेकिन हर बार आदेश को पार्टी कूलर बताकर उसे जेनरल आदेश मानने से प्रशासन इनकार कर रहा है. सभी लोग हाईकोर्ट जाने में सक्षम नहीं हैं. पूर्व मंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा भी गैर मजरूआ जमीन के मामले में भी पिछले 30 वर्षों से दखलकार चले आ रहे हैं उसे रैयती मानकर भुगतान किया गया है. कोडरमा-हजारीबाग रेल परियोजना व डीवीसी कोडरमा थर्मल पावर स्टेशन जैसी परियोजना हैं. ऐसे में गैरमजरूआ खास जमीन की खरीद बिक्री पर लगी रोक अव्यवहारिक है.
उन्होंने कहा है कि अधिकतर जमीन रामगढ़ राजा द्वारा बंदोबस्त की गयी थी, जिसका रिटर्न नहीं दिया गया था. इन जमीन पर पक्के मकान बन चुके है. बाद के उपायुक्त के रवि कुमार ने इस मामले में सरकार को पत्र लिख कर निर्णय लेने का अनुरोध किया था, पर आज तक कुछ नहीं हुआ.
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