पकड़ से दूर हैं हेराफेरी के आरोपी

Updated at : 05 Dec 2015 2:34 AM (IST)
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पकड़ से दूर हैं हेराफेरी के आरोपी

एटीएम में पैसा डालने के काम में हेराफेरी कर लाखों रुपये उड़ाने का मामला कोडरमा : बैंक आफ इंडिया के एटीएम में पैसा डालने के नाम पर हुए लाखों रुपये के गबन के मामले में कोडरमा पुलिस सुस्त दिख रही है, वहीं बैंक के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं. जिस प्रकार बैंक आॅफ इंडिया के […]

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एटीएम में पैसा डालने के काम में हेराफेरी कर लाखों रुपये उड़ाने का मामला

कोडरमा : बैंक आफ इंडिया के एटीएम में पैसा डालने के नाम पर हुए लाखों रुपये के गबन के मामले में कोडरमा पुलिस सुस्त दिख रही है, वहीं बैंक के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं. जिस प्रकार बैंक आॅफ इंडिया के विभिन्न एटीएम में पैसा डालने का काम करनेवाली कंपनी सिक्यूरिटी ट्रांस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसआइपीएल) द्वारा अलग-अलग मामले इतने दिनों बाद दर्ज कराये जा रहे हैं.

उससे भी कई सवाल उठ रहे हैं. बैंक के एटीएम में पैसा डालने का काम करनेवाली कंपनी एसआइपीएल के तिलैया शाखा का प्रबंधक विकास कुमार व राजेश पिलानिया ने पूरी कहानी रची, लेकिन इसमें कई लोगों के और मिले होने की संभावना प्रबल होती दिख रही है. इसकी चर्चा जोरों पर है. इस मामले को लेकर एसपी नवीन कुमार सिन्हा की ओर से गठित की गयी टीम ने अब तक जांच भी शुरू नहीं की है. टीम का नेतृत्व कर रहे डीएसपी कर्मपाल उरांव ने पूछे जाने पर कहा कि अभी चुनाव ड्यूटी में व्यस्त हैं. ऐसे में जांच शुरू नहीं हो पायी. अब मतगणना के बाद ही कुछ हो पायेगा.

ऐसे में सवाल उठ रहा कि जिन शातिर अपराधियों ने सबसे सुरक्षित माने जानेवाली एटीएम प्रणाली का ध्वस्त कर लाखों रुपये गबन कर लिए वे क्या इतनी आसानी से पुलिस की गिरफ्त में आयेंगे और तब जब पुलिस पूरा मामला सामने आने के बाद सुस्त दिख रही है.

बैंक व एसआइपीएल कंपनी की भूमिका पर इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि जब इतनी बड़ी राशि का घपला हुआ, तो मामला दर्ज कराने में इतनी देरी क्यों की गयी. यही नहीं बैंक से डिपोजिट स्टेटमेंट गायब होने की बात भी एसपी ने कही है. बता दें कि एटीएम में पैसा डालने के नाम पर हुए गबन की राशि अभी तक 34 लाख रुपये तक पहुंच गयी है. पहला मामला बरही में करीब 12 लाख रुपये गबन का तो, दूसरा मामला जयनगर में छह लाख, 56 हजार रुपये के गबन का और तीसरा मामला चौपारण थाना में करीब 16 लाख रुपये गबन का दर्ज किया गया है. अलग-अलग थानों में मामला दर्ज होने से पुलिस को-आर्डिनेशन भी नहीं बैठा पा रही है.

बीस दिन बाद दर्ज हुआ मामला: एसआइपीएल कंपनी के शाखा प्रबंधक अजीत कुमार पांडेय की ओर से दिये गये आवेदन के अनुसार ही गड़बड़ी का खुलासा सात नवंबर से 12 नवंबर तक हुई जांच में हो गया था.

राशि लाखों में है. इसको लेकर पहली प्राथमिकी बीस दिन बाद एक दिसंबर को बरही में दर्ज करायी गयी. जानकारी के अनुसार कंपनी के अधिकारियों व सीएमएस की टीम ने सात नवंबर को तिलैया में जांच की थी. 12 नवंबर को बरही के एटीएम में जांच के दौरान गड़बड़ी सामने आ गयी थी.

टीम में बेकअप कस्टोडियन प्रशांत कुमार, एसआइपीएल के जय कुमार, एसआइपीएल हेडक्वार्टर के मनमोहन, सीएमएस के उमेश, एफआइएस के प्रतिनिधि भूपेंद्र व नवीन शामिल थे.

कोडरमा में पासपोर्ट बनाने का नहीं मिली रिपोर्ट: पुलिस की अब तक की सुस्त जांच में यह बात ही सामने आयी है कि आरोपियों का पासपोर्ट कोडरमा में नहीं बना है. बताया जाता है कि इनका पासपोर्ट कहीं और से निर्गत किया गया हो.

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