न योजनाओं का लाभ, न गरीबों को अपेक्षित मदद

Updated at : 06 Jan 2015 9:53 AM (IST)
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न योजनाओं का लाभ, न गरीबों को अपेक्षित मदद

नगर पंचायत की कार्यशैली पर उठने लगे हैं सवाल गौतम राणा कोडरमा बाजार : लोगों को सुविधाएं दिलाने के लिए सरकार कदम तो उठाती है, पर उसका लाभ आम लोगों तक न तो समय पर पहुंचता है और न ही इसको लेकर कारगर कदम उठाये जाते हैं. शहरों की तसवीर बदलने के लिए नगर पंचायत […]

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नगर पंचायत की कार्यशैली पर उठने लगे हैं सवाल
गौतम राणा
कोडरमा बाजार : लोगों को सुविधाएं दिलाने के लिए सरकार कदम तो उठाती है, पर उसका लाभ आम लोगों तक न तो समय पर पहुंचता है और न ही इसको लेकर कारगर कदम उठाये जाते हैं.
शहरों की तसवीर बदलने के लिए नगर पंचायत से लेकर नगर पर्षद तक का गठन हुआ पर नगर पर्षद झुमरीतिलैया की तरह नगर पंचायत कोडरमा का भी बुरा हाल है. यहां जनता की योजनाओं से न तो पदाधिकारियों को सरोकार है और न ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व पार्षदों का ध्यान विभिन्न योजनाओं की स्थिति को देखने से यह लगता है कि लोगों की सुविधाओं पर नगर पंचायत कुंडली मार कर बैठी है.
चाहे रिक्शा चालकों को मिलनेवाली सुविधाएं की बात हो या फिर बीपीएल परिवार के लोगों को सोना सोबरन धोती साड़ी योजना या फिर सामाजिक सुरक्षा कोषांग से ठंड को देखते हुए कंबल उपलब्ध कराने की बात हो.
न तो बीमा हुआ और न ही टूल- किट मिला : नगर पंचायत को वर्ष 2013 में नगर विकास विभाग की ओर से 10 रिक्शा चालकों को रिक्शा उपलब्ध कराया गया. इसके बाद उसी समय टूल किट, रिक्शा चालकों के लिए वर्दी व उनके लिए बीमा कराने को लेकर चार- चार हजार रुपये देने का ऐलान था.
मार्च 2014 में इससे संबंधित पैसा नगर पंचायत को विभाग की ओर से भेज दिया गया. पर जानकारी के अनुसार आज तक यह पैसा रिक्शा चालकों को उपलब्ध नहीं कराया गया.
कंबलों का भी नहीं हुआ वितरण : बढ़ती ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन व सामाजिक सुरक्षा कोषांग ने महीनों पहले कदम तो उठाये, पर नगर पंचायत को सितंबर में ही उपलब्ध कराये गये 150 कंबलों का आज तक वितरण नहीं हो पाया है. बताया जाता है कि नगर पंचायत के 12 वार्ड में प्रत्येक में दस दस कंबल का वितरण किया जाना है. पूछे जाने पर कार्यपालक पदाधिकारी ने कहा कि पार्षदों को आज ही कंबल भेज दिया जायेगा.
एनजीओ से पूछा जायेगा स्पष्टीकरण : अध्यक्ष : हंगामे के बाद नगर पंचायत अध्यक्ष मो शब्बन ने बताया कि नगर विकास विभाग की ओर से वितरण के लिए 40 सिलाई मशीन ही उपलब्ध करायी गयी. जबकि दो सत्रो में 140 लड़कियों ने इसका प्रशिक्षण लिया है. वरीयता के आधार पर वितरण होना है. उन्होंने कहा कि ऐसा क्यों नहीं हुआ. इसको लेकर एनजीओ से स्पष्टीकरण पूछा जायेगा. संतोष जनक जवाब नहीं मिला, तो कार्रवाई होगी. कोशिश होगी कि युवाओं को दुबारा ट्रेनिंग दी जाये.
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