सामूहिक नरसंहार से दहल उठा था सतगावां, 15 वर्ष बाद फैसला

Updated at : 19 Feb 2020 11:56 PM (IST)
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सामूहिक नरसंहार से दहल उठा था सतगावां, 15 वर्ष बाद फैसला

डुमरी नरसंहार फैसला आने पर मृतक की पत्नी बोली जिसने जैसा किया भगवान वैसा ही करेगा, फांसी की सजा सुन खुश हूं कोडरमा बाजार/सतगावां : आज से करीब 15 वर्ष छह माह पहले सामूहिक नरसंहार से सुदूरवर्ती सतगावां प्रखंड की धरती दहल उठी थी. डुमरी गांव में एक साथ एक ही परिवार के चार लोगों […]

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डुमरी नरसंहार

फैसला आने पर मृतक की पत्नी बोली
जिसने जैसा किया भगवान वैसा ही करेगा, फांसी की सजा सुन खुश हूं
कोडरमा बाजार/सतगावां : आज से करीब 15 वर्ष छह माह पहले सामूहिक नरसंहार से सुदूरवर्ती सतगावां प्रखंड की धरती दहल उठी थी. डुमरी गांव में एक साथ एक ही परिवार के चार लोगों की नृशंस हत्या से हर तरफ चीख पुकार मची थी. इस घटना के बाद इस गांव में दो पक्षों के बीच चल रही लड़ाई ने दूसरा मोड़ ले लिया तो इसका असर आज तक दिखता है. आज भी दोनों पक्ष के अधिकतर पारिवारिक सदस्य बाहर ही रहते हैं. 25 सितंबर 2004 को जिस सेवानिवृत्त शिक्षक कपिलदेव प्रसाद यादव व उनके बेटों की हत्या की गयी थी. आज भी उनके परिवार के लोग सतगावां में रहना पसंद नहीं करते हैं.
हालांकि, मृतक कपिलदेव प्रसाद यादव की पत्नी सरस्वती देवी डुमरी गांव में रहती है. स्थानीय अदालत के द्वारा सामूहिक हत्या के दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाये जाने पर बुजुर्ग महिला ने खुशी जाहिर की. महिला ने कहा, यहे जगहिया पर मारले हलो बाबू, हमर पति व बेटवन के सब मार देले हेलो. तहिने से भगवान से प्रार्थना कर हेलिए मारे वलहेन के जरूरे भुगते पड़ते. भगवान ने बढ़िया करलके. महिला ने पूछे जाने पर कहा कोर्ट के फैसले से खुशी है, पर परिवार के लोग आज भी डर से यहां नहीं आना चाहते हैं. महिला ने इससे ज्यादा कुछ भी नहीं कहा.
घर से निकाल कर दी गयी थी हत्या : जानकारी के अनुसार घटना के बाद थाना में सूचक सुरेश कुमार द्वारा दिये गये आवेदन में कहा गया था कि 25 सितंबर 2004 की रात करीब आठ बजे वे व नीरज कुमार दोनों घर के छत पर बैठे थे. उसी समय हरवे हथियार, फरसा, रायफल, गड़ासा से लैस होकर घर पर हमला कर पिता कपिलदेव प्रसाद यादव, भाई नीरज कुमार उर्फ सुधीर कुमार, अनोज कुमार व सकलदेव यादव की हत्या कर दी गयी.
दर्ज मामले में रंजीत प्रसाद यादव, विपिन प्रसाद यादव, सुनील प्रसाद यादव (पिता जयप्रकाश यादव), नवलेश प्रसाद यादव (पिता कुलदीप प्रसाद यादव), राजेश प्रसाद यादव (पिता कुलदीप प्रसाद यादव), रामवृक्ष प्रसाद यादव (पिता वजीर राउत), राजकुमार यादव (पिता स्व. कैलाश राउत), रामप्रसाद यादव (पिता स्व. काली राउत), उमेश यादव (पिता फागु यादव), संजय यादव (पिता बाल किशुन यादव), अनिल यादव (पिता जयप्रकाश यादव), दारोगी प्रसाद यादव समेत 16 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था. उपरोक्त लोगों पर फरसा, गड़ासा आदि हथियार से गर्दन काट कर चार लोगों की नृशंस हत्या करने का आरोप था.
पुलिस ने उस समय सतगांवा थाना कांड संख्या 34/04 धारा 396, 302, 3/4 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 17 सीएलए एक्ट के तहत दर्ज करते हुए अनुसंधान शुरू किया था. अनुसंधान के दौरान अनुसंधानकर्ता के द्वारा धारा 147, 148, 149, 458, 380, 302 एवं 3/5 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के अंतर्गत सात अभियुक्त दारोगी प्रसाद यादव (मृत), रंजीत यादव, विपिन यादव, नवलेश प्रसाद यादव, संजय प्रसाद यादव, रामवृक्ष प्रसाद यादव व राजेश प्रसाद यादव के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया.
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