ईदगाह परिसर में अल्हाज हाफिज निशार अहमद वारसी के सालाना उर्स के मौके पर गुरुवार की रात जलसा-ए-दस्तार बंदी का आयोजन

Updated at : 30 Jun 2018 5:34 AM (IST)
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ईदगाह परिसर में अल्हाज हाफिज निशार अहमद वारसी के सालाना उर्स के मौके पर गुरुवार की रात जलसा-ए-दस्तार बंदी का आयोजन

कोडरमा : जिला मुख्यालय स्थित जलवाबाद ईदगाह परिसर में अल्हाज हाफिज निशार अहमद वारसी के सालाना उर्स के मौके पर गुरुवार की रात जलसा-ए-दस्तार बंदी का आयोजन किया गया. जलसा की अध्यक्षता कर रहे मौलाना शहादत हुसैन ने मदरसा मदिनतुररसुल के संस्थापक हाफिज निशार अहमद वारसी के जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि […]

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कोडरमा : जिला मुख्यालय स्थित जलवाबाद ईदगाह परिसर में अल्हाज हाफिज निशार अहमद वारसी के सालाना उर्स के मौके पर गुरुवार की रात जलसा-ए-दस्तार बंदी का आयोजन किया गया. जलसा की अध्यक्षता कर रहे मौलाना शहादत हुसैन ने मदरसा मदिनतुररसुल के संस्थापक हाफिज निशार अहमद वारसी के जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें बहुत फिक्र रहती थी कि मुसलिम बच्चे कैसे शिक्षत हों. इसके लिये वे हमेशा प्रयासरत रहते थे. उन्होंने कहा कि उनके सपने को पूरा करने के उद्देश्य से मोहम्मद फैज वारसी व अन्य लोगों ने पिछले साल कलन्द्रिया पब्लिक स्कूल की शुरुआत की है.

मदरसा मदिनतुर्रसुल में पढ़ने वाले बच्चे जहां हाफिज व कारी बनते आ रहे हैं अब इंटर तक की पढ़ाई भी कर सकेंगे. जलसा में मुख्य रूप से मौलाना सैयद इकबाल हुसैनी (गया बिहार) ने खिताब करते हुए कहा कि शिक्षा के बिना जिंदगी अधूरी है. हम शिक्षित होंगे तभी हम दुनिया में कामयाब हो सकेंगे. अल्लाह पाक ने हमारे प्यारे नबी-ए-पाक को पढ़ाया और हमारे नबी ने इल्म हासिल करना जरूरी फर्ज करार दिया है. कुछ किताबी शिक्षा होती है और कुछ नजरों से पढ़ाया जाता है जो भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि अल्लाह लिबास-शक्ल सूरत नहीं देखता हमारा नियत इरादा देखता है. उन्होंने कहा कि इस्लाम मुहब्बत का पैगाम देता है. इस्लाम में नफरत की कोई जगह नहीं. हमें अपने किरदार अपने व्यवहार से लोगों के दिलों में इस्लाम की मुहब्बत पैदा करनी है. जलसा में शायर शमीम रहबर, अकील अख्तर नूरी सहित कई शायर ए इस्लाम ने हजरत मोहम्मद (स) की शान में नात-ए-पाक पढ़े. कार्यक्रम का संचालन मौलाना अब्दुल रहमान ने किया. जलसा को सफल बनाने में मो फैज वारसी, कारी इफ्तेखार, कारी खैरुलवरा, कारी आफताब, मौलाना महबूब, महबूब वारसी, परवेज आलम, मो सकीब, मो सब्बू, मो प्रिंस, मो जुनैद, मो रियाज, फैज खान, मो राजू, छोटू, मो शारिक आदि ने अहम भूमिका निभायी. जलसा के अंत में मुल्क की तरक्की, अमन व शांति की दुआ की गई और सलात ओ सलाम पढ़ा गया.

17 छात्रों को दी गयी हाफिज व कारी की उपाधि : जलसा-ए-दस्तारबंदी के मौके पर जलवाबाद मदरसा मदिनतुररसुल में पढ़ रहे जिले व आसपास के विभिन्न जिलों के 17 छात्रों को हाफिज व कारी की उपाधि दी गयी. साथ ही उनके सर पर दस्तार (पगड़ी) बांधी गयी और हाथों में कुरान दिया गया.
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