जवाहर नवोदय विद्यालय में छात्र का शव मिलने का मामला स्कूल में सन्नाटा, बच्चे दिखे गम में

Updated at : 22 Jul 2017 1:12 PM (IST)
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जवाहर नवोदय विद्यालय में छात्र का शव मिलने का मामला स्कूल में सन्नाटा, बच्चे दिखे गम में

कोडरमा बाजार. जवाहर नवोदय विद्यालय पुतो में 11वीं कक्षा के छात्र अंकुर अंबष्ठ की संदिग्ध मौत के बाद विद्यालय में सन्नाटा पसरा दिखा. शुरुआत में मामले की जानकारी मिलने पर कुछ लोग विद्यालय पहुंचे पर शव के सदर अस्पताल में होने पर अधिकतर लोग वहां पहुंच गये. बाद में जब कोडरमा थाना पुलिस जांच के […]

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कोडरमा बाजार. जवाहर नवोदय विद्यालय पुतो में 11वीं कक्षा के छात्र अंकुर अंबष्ठ की संदिग्ध मौत के बाद विद्यालय में सन्नाटा पसरा दिखा. शुरुआत में मामले की जानकारी मिलने पर कुछ लोग विद्यालय पहुंचे पर शव के सदर अस्पताल में होने पर अधिकतर लोग वहां पहुंच गये. बाद में जब कोडरमा थाना पुलिस जांच के लिए हॉस्टल पहुंची, तो अंकुर के सहपाठियों व अन्य छात्रों से मामले को लेकर जानकारी ली. इस दौरान छात्रों के चेहरे पर अपने दोस्त की मौत का गम साफ दिखा.

हालांकि, विद्यालय में इस घटना के बाद भी पठन पाठन जारी था. शिक्षक अन्य दिनों की भांति छात्रों को पढ़ाने में लगे थे. घटना को लेकर कई बच्चे सहमे नजर आये. जिले के प्रतिष्ठित स्कूल में इस तरह की पहली घटना से हर कोई हतप्रभ है. जैसे-जैसे घटना की खबर फैलते गयी, लोगों का हुजूम स्कूल परिसर में जुटता गया.

पढ़ें, कथित सुसाइड नोट में क्या लिखा है…
मैं दुविधा में हूं और न ही मेरे पास कोई ठोस वजह है, जो पाप मैं करने जा रहा हूं. यह बिल्कुल बेतुकी बात हो सकती है कि मैं इतना बड़ा कदम उठाने जा रहा हूं, जिसकी कोई ठोस वजह नहीं है. मैं नहीं जानता कि घड़ी की कौन सी सूई वह बनाती है, जो मैं हूं. लेकिन मैं जानता हूं कि मैं अब वह नहीं हूं जो कभी रहा करता था. मैं सबसे अधिक अाइंस्टीन को पसंद करता था, किसी से भी अधिक. मैं एक ऐसा लड़का था, जो किसी लड़की से बात करने से अधिक किताब पढ़ना पसंद करता था. मैं एक छात्र रहा हूं, जो प्राइज जीतने से अधिक सवालों को हल करना पसंद करता था. मैं पूरी तरह से बरबाद हो चुका हूं. मैं दूसरे लोगों की तरह ही सामान्य जीवन जीना चाहता था. मैंने ठीक होने की कोशिश की, लेकिन अब थक चुका हूं. मैं जन्मजात ‘गॉड गिफ्टेड’ लोगों का फैन था और उसी तरह बनना चाहता था. हमेशा सोचा करता था कि मैं दूसरे किसी ‘गॉड गिफ्टेड’ आइंस्टीन, रामानुजन की तरह था, लेकिन मैं गलत था. मैं किसी को दोषी ठहराना नहीं चाहता हूं. इस आत्महत्या के लिए सिर्फ मैं और मैं ही जिम्मेदार हूं. हर किसी के जीवन में कोई ड्रीम होता है और मेरा भी एक ड्रीम था.
(अंग्रेजी में लिखे मिले सुसाइड नोट का यह हिंदी अनुवाद )
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