राष्ट्रपति भवन ने TMC को फिर किया निराश, द्रौपदी मुर्मू ने नहीं दिया मिलने का समय

Updated at : 25 Mar 2026 6:25 AM (IST)
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President Draupadi Murmu News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मिलने का अनुरोध तीसरी बार ठुकरा दिया है. जानें क्या है बंगाल का आदिवासी सम्मेलन विवाद और ममता बनर्जी का आरोप.

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President Draupadi Murmu: पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बज चुका है. दिल्ली के गलियारों में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रपति भवन के बीच ‘शह-मात’ का खेल जारी है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक बार फिर समय की कमी का हवाला देते हुए तृणमूल प्रतिनिधिमंडल से मिलने के अनुरोध को ठुकरा दिया है. बंगाल की सत्ताधारी पार्टी अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं और ‘समावेशी विकास’ का रिपोर्ट कार्ड राष्ट्रपति को सौंपना चाहती है, लेकिन राष्ट्रपति भवन से मिलने का समय नहीं मिल रहा है.

राष्ट्रपति भवन को टीएमसी ने तीसरी बार लिखी चिट्ठी

  • तृणमूल कांग्रेस ने सबसे पहले 9 मार्च को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मुलाकात का वक्त मांगा था, लेकिन 11 मार्च को समय के अभाव का हवाला देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया.
  • ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने दोबारा 16 और 20 मार्च के बीच मिलने का समय मांगा, लेकिन 22 मार्च को राष्ट्रपति भवन से फिर जवाब आया- समयाभाव के चलते नहीं मिल सकतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू.
  • हार न मानते हुए ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार (23 मार्च) को फिर से पत्र भेजकर 24 मार्च से 2 अप्रैल के बीच किसी भी दिन मुलाकात की गुहार लगायी.

आदिवासी सम्मेलन विवाद की कड़वाहट या प्रोटोकॉल?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह इनकार महज ‘व्यस्तता’ नहीं, बल्कि हाल ही में राष्ट्रपति की बंगाल यात्रा के दौरान हुए विवाद का नतीजा है. 7 मार्च को बंगाल दौरे पर आयीं राष्ट्रपति ने संताल समुदाय के सम्मेलन का वेन्यू (आयोजन स्थल) बदलने पर नाराजगी जतायी थी. वह इस बात से भी आहत थीं कि उनकी यात्रा के दौरान न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और न ही कोई कैबिनेट मंत्री वहां मौजूद था.

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ममता बनर्जी ने किया था सियासी पलटवार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की नाराजगी पर वेस्ट बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी ने महामहिम पर ‘भाजपा के इशारे पर’ बोलने का आरोप लगाया. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने मणिपुर हिंसा और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में लाखों लोगों के नाम हटाये जाने पर राष्ट्रपति की चुप्पी साधने के आरोप लगा दिये.

पीएम मोदी और भाजपा का करारा हमला

इस विवाद ने चुनावी मोड़ ले लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के प्रति तृणमूल के व्यवहार को ‘शर्मनाक और अप्रत्याशित’ करार दिया. भाजपा ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार ने एक आदिवासी राष्ट्रपति का अपमान करके सभी मर्यादाएं लांघ दी हैं. अब देखना यह है कि 2 अप्रैल से पहले राष्ट्रपति भवन अपने दरवाजे तृणमूल के लिए खोलता है या यह ‘लेटर वॉर’ और तेज होगा.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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