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एड्स पीड़िता का टूटा पैर तो रिम्स प्रशासन ने ऑपरेशन के बजाय दे डाली फिजियोथेरेपी कराने की सलाह, जानें पूरा मामला

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
रिम्स अस्पताल में एड्स पीड़ित मरीजाें की सर्जरी एक साल से  नहीं हो रही है.
रिम्स अस्पताल में एड्स पीड़ित मरीजाें की सर्जरी एक साल से नहीं हो रही है.
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Rims Ranchi News, Koderma News रांची : राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में एड्स पीड़ित मरीजाें की सर्जरी एक साल से नहीं हो रही है. ऑपरेशन कराने की आस लेकर आये मरीजों को किट आने तक इंतजार करने की सलाह दी जा रही है. ताजा मामला रिम्स के हड्डी विभाग में सामने आया है. कोडरमा के रहनेवाले 69 वर्षीय एड्स पीड़ित का ऑपरेशन नहीं किया गया. वहीं वृद्ध मरीज खटिया पर पड़ा कराह रहा है.

रिम्स से पहले धनबाद के निजी अस्पताल पॉपुलर नर्सिंग होम में इलाज किये बिना रिम्स रेफर कर दिया गया. परिजनों का आरोप है कि निजी नर्सिंग होम के डॉक्टर ने पहले पैर ठीक करने के लिए ऑपरेशन को जरूरी बताया, पर जब मरीज के एचआइवी पॉजिटिव होने की जानकारी हुई, तो ऑपरेशन करने से इंकार करते हुए रिम्स रांची रेफर कर दिया गया.

इसके बाद परिजन बेहतर इलाज के लिए रिम्स आये. रिम्स के हड्डी विभाग मेें डॉक्टर को जब एचआइवी पॉजीटिव की जानकारी हुई तो फिजियोथेरेपी की सलाह दे दी, जबकि एक्सरे में पैर टूटने की पुष्टि हुई है. मामले को लेकर पीड़ित के भाई ने रिम्स अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप के नाम शिकायती पत्र लिखा है. समाजसेवी इंद्रजीत सामंता ने बताया कि मरीज दस वर्षों से एड्स से पीड़ित है. दस दिन पहले बरही-कोडरमा फोरलेन निर्माण कार्य के दौरान सड़क पर चलने के क्रम में वे गिर गए, जिससे उनके बाएं पैर की हड्डी टूट गयी.

पीड़ित के भाई ने बताया कि 14 जनवरी को मरीज को धनबाद में डाॅ मंजीत सिंह संधू के पास ले गये, जहां उन्होंने ऑपरेशन करने की सलाह दी.

डॉक्टर को मरीज के एचआइवी पॉजिटिव की जानकारी हुई तो रिम्स रेफर कर दिया गया. रिम्स में कहा गया कि यहां ऑपरेशन नहीं हो सकता है. डाॅ एलबी मांझी से आग्रह किया गया, लेकिन उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्ष से एड्स किट रिम्स प्रबंधन उपलब्ध नहीं करा रहा है. फिजियोथेरेपी का सुझाव देकर वापस भेज दिया.

कोडरमा के एड्स पीड़ित का पैर टूटा

िरम्स के डॉक्टर ने अॉपरेशन की जगह फिजियोथेरेपी कराने की दी सलाह

एड्स मरीजों के ऑपरेशन में प्रयोग होनेवाला किट दो साल से नहीं है. एड्स मरीज की छोटी सर्जरी बिना किट कर देते है, लेकिन बड़ी सर्जरी में खतरा है. किट में ग्लब्स अहम है, क्योंकि सामान्य ग्लब्स से ऑपरेशन करते समय शरीर में चूभने की संभावना रहती है. किट मिल जाये तो बड़ी सर्जरी की जा सकती है. वैसे ऑपरेशन के बिना भी कुछ दिन तक मरीज रह सकता है, इसलिए फिजियोथेरेपी की सलाह दी गयी है.

डॉ एलबी मांझी, विभागाध्यक्ष रिम्स

Posted By : Sameer Oraon

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