नयी व पुरानी संस्कृति में तालमेल बना कर आगे बढ़ना होगा : एलिस ओड़ेया

मुरहू के पेरका स्थित लीड्स सेंटर में लीड्स संस्था के तत्वावधान में आदिवासी समागम का आयोजन किया गया.
खूंटी. मुरहू के पेरका स्थित लीड्स सेंटर में लीड्स संस्था के तत्वावधान में आदिवासी समागम का आयोजन किया गया. समागम का उद्घाटन मुरहू प्रखंड प्रमुख एलिस ओड़या, जिला परिषद सदस्य मुरहू दयामनी मुंडू और इंडिया लिटरेसी प्रोजेक्ट संस्था के विक्टर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. इस अवसर पर मुरहू प्रखंड प्रमुख एलिस ओड़ेया ने कहा कि आदिवासी संस्कृति विश्व की सबसे पुरानी संस्कृति है. आदिवासी जीवन पद्धति प्रकृति से जुड़ी हुई है और इसी पर आधारित होकर उनका जीवन चलता है. आज का युग तकनीकी युग है और ऐसे में नयी और पुरानी संस्कृति में तालमेल बनाकर आगे बढ़ना होगा. जिला परिषद सदस्य दयामनी मुंडू ने कहा कि आदिवासी संस्कृति के रीति रिवाजों में ज्ञान-विज्ञान समाहित है. आदिवासी समाज की कृषि और कला की पारंपरिक विधियों से भी काफी कुछ सीखा जा सकता है. संस्था के निदेशक एके सिेह ने आदिवासी समागम के संबंध में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि आदिवासी इस धरती पर प्रकृति पूजक के रूप में जाने जाते हैं. ये हमेशा अपने जल, जंगल, जमीन की रक्षा के तैयार खड़े रहते हैं. हमें आदिवासी परंपरा, संस्कृति को बचा कर रखने की आवश्यकता है. निर्झरिणी रथ ने कहा कि आदिवासी एक सभ्यता है ऐसी संस्कृति है जो पूरी तरह से प्रकृति पर आधारित है. कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय के बच्चियों, पुरुषों और महिलाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी. कार्यक्रम में मुरहू प्रखंड के विभिन्न गांव से आदिवासी समाज के लोगों के साथ साथ राज्य के अन्य जिलों आनंदपुर, जलडेगा, महुवाटांड़ से भी आदिवासी समुदाय के लोगों ने भी अपना प्रस्तुती दिया. मंच संचालन अनंत तांती और धन्यवाद ज्ञापन शांता कुमारी ने किया.
आदिवासी समागम का किया गया आयोजनB
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