पोक्सो मामलों का विचारण एक वर्ष के भीतर पूर्ण होना चाहिए

बाल संरक्षण प्रणाली, पोक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम पर परामर्श कार्यक्रम का आयोजन
खूंटी. बाल संरक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करना-पोक्सो अधिनियम एवं किशोर न्याय अधिनियम के मध्य समन्वय विषय पर शनिवार को स्थानीय डालसा में बहु-हितधारक परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) राकेश कुमार मिश्र ने पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत बाल संरक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करने पर विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कानून के विभिन्न प्रावधानों, पीड़ित और अभियुक्त की आयु निर्धारण, पोक्सो अधिनियम के लैंगिक-तटस्थ होने तथा अनुसंधान पदाधिकारी द्वारा पीड़ित का बयान यथाशीघ्र दर्ज किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया. कहा कि पोक्सो मामलों का विचारण एक वर्ष के भीतर पूर्ण किया जाना चाहिए. पीड़ित की पहचान का प्रकटीकरण दंडनीय अपराध है. लोक अभियोजक वेद प्रकाश ने पोक्सो और किशोर न्याय मामलों में उचित एवं प्रभावी अनुसंधान से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डाला. उन्होंने अनुसंधान में पायी जानेवाली कमियों को कम करने और समय पर एवं गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के संबंध में जानकारी दी. कार्यक्रम को किशोर न्याय बोर्ड प्रधान दंडाधिकारी विद्यावती कुमारी, जिला बाल संरक्षण इकाई के संरक्षण पदाधिकारी समीमुद्दीन अंसारी, सिविल सर्जन डॉ नागेश्वर मांझी ने भी संबोधित किया. इस अवसर पर मुख्य रूप से डालसा सचिव कमलेश बेहरा, सहायक विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता अमरदीप, नम्रता कुमारी सहित सभी थाना क्षेत्र के अनुसंधान पदाधिकारी, पीएलवी, सपोर्ट पर्सन सहित अन्य उपस्थित थे.
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