अपनी मातृभाषा में पढ़ाई होने से बच्चों में बढ़ रही है रूचि

Published by : CHANDAN KUMAR Updated At : 10 Feb 2026 7:48 PM

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जिले के 151 स्कूलों में कक्षा एक से तीन तक के विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान की जा रही है.

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खूंटी, चंदन कुमार. बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम पलाश के अंतर्गत खूंटी जिले के 151 स्कूलों में कक्षा एक से तीन तक के विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान की जा रही है. इसके तहत खूंटी के अनिगड़ा स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय सह मध्य विद्यालय में विद्यार्थियों के शिक्षा ग्रहण करने की क्षमता में बदलाव देखा जा रहा है. अपनी मातृभाषा में पढ़ाई होने से विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है वहीं स्कूल में उनका ठहराव भी हो रहा है. स्कूल में वर्ष 2024 से मुंडारी में शिक्षा दी जा रही है. स्कूल में पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा के बच्चों को मुंडारी भाषा में सिखाया जा रहा है. इससे बच्चों में पढ़ाई करने के प्रति रूचि नजर आ रही है. वहीं वे जल्दी सीख भी रहे हैं. स्कूल में उन्हें क्षेत्रीय परिवेश, लोकगीत, लोकनृत्य आदि से जोड़ कर सिखाया जा रहा है. शुरुआत में स्कूल के शिक्षकों को थोड़ा अजीब लगा था, लेकिन जब इसकी शुरुआत हुई तो शिक्षकों के साथ-साथ बच्चे और अभिभावक भी सहज हो गये. मुंडारी भाषा का उपयोग किये जाने के कारण स्कूल में नामांकन के बाद भी बच्चों को परेशानी नहीं हो रही है, बल्कि वे अपने घरेलू बातचीत की तरह ही स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं. उन्हे पाठ्यक्रम आसान लग रहा है. उनके सीखने की क्षमता में विकास नजर आ रहा है. स्कूल में शिक्षक मुंडारी भाषा में 45 मिनट की भाषा और गणित का सिखा रहे हैं. इसके लिए स्कूल के तीन शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है. कार्यक्रम में लैंग्वेज लर्निंग फाउंडेशन सहयोग कर रही है. स्कूल की शिक्षिका चंद्रावती सारू कार्यक्रम के तहत स्टेट रिसोर्स ग्रुप में सदस्य हैं. बच्चों को मुंडारी भाषा में सीखने के लिए सामग्री तैयार करने में योगदान देती हैं. वहीं पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद भी करने में सहयोग करती हैं. उन्होंने बताया कि मुंडारी भाषा में सिखाये जाने से बच्चे आसानी से पढ़ाई भी कर रहे हैं और अपने क्षेत्र की संस्कृति को भी जान रहे हैं. मातृभाषा में पढ़ने से उन्हें अपनापन जैसा महसूस होता है. स्कूल आने में आनाकानी नहीं करते हैं और गीत तथा खेल के माध्यम से सीख रहे हैं. अभिभावकों को भी सहूलियत हो रही है. कार्यक्रम के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर अंकज कुमार ने कहा कि कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को और बीआरपी-सीआरपी को प्रशिक्षण दिया गया है. इससे शिक्षा में सुधार के अच्छे परिणाम नजर आ रहा है. स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका रश्मि कुजूर ने कहा कि अपने ही भाषा में शिक्षा मिलने से बच्चे सहज महसूस करते हैं. वे आसानी से सीख रहे हैं. उनके अंदर किसी प्रकार की दिक्कत होती है, तो वे खुलकर बातों को भी रखते हैं. उन्हें एक अच्छा माहौल मिल रहा है.

जिले के 151 स्कूलों में पहली से तीसरी कक्षा के विद्यार्थियों मातृभाषा में दी जा रही है शिक्षा

स्कूल में शिक्षक मुंडारी भाषा में 45 मिनट की भाषा और गणित का सिखा रहे हैंB

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