आपदा प्रबंधन के लिए दी जमीन कर दी विस्तारीकरण की पहल

Updated at : 04 Mar 2017 7:37 AM (IST)
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आपदा प्रबंधन के लिए दी जमीन कर दी विस्तारीकरण की पहल

खलारी : केडीएच प्रबंधन ने वन विभाग से आपदा प्रबंधन के नाम पर जमीन मांगा व उसपर खदान विस्तारीकरण का काम चालू कर दिया गया. उल्लेखनीय है कि करकट्टा स्थित केडीएच पैच का काम आउटसोर्सिंग में वीपीआर कंपनी को दिया गया है. कंपनी ने निर्धारित सीमा तक खदान खोद दी. जहां खदान खुदाई की गयी, […]

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खलारी : केडीएच प्रबंधन ने वन विभाग से आपदा प्रबंधन के नाम पर जमीन मांगा व उसपर खदान विस्तारीकरण का काम चालू कर दिया गया. उल्लेखनीय है कि करकट्टा स्थित केडीएच पैच का काम आउटसोर्सिंग में वीपीआर कंपनी को दिया गया है. कंपनी ने निर्धारित सीमा तक खदान खोद दी. जहां खदान खुदाई की गयी, वहां पहले से भूमिगत खदान चलाया गया था. नतीजा हुआ कि खदान की सीमा पर कोयले के खुले फेस में आग पकड़ ली. अखबार में खबर छपी, तो कंपनी का दलील था कि उसके पास आग बुझाने के लिए जमीन भी नहीं है.

केडीएच की मांग पर वन विभाग ने आपदा प्रबंधन के तहत खदान से सटे 500 फीट लंबी व 50 मीटर चौड़ी जमीन पर जाने की अनुमति दे दी ताकि आग को बुझाया जा सके. लेकिन कंपनी ने इस जमीन की सीमा से अधिक जमीन पर विस्तारीकरण का काम शुरू कर दिया. इस दौरान दर्जनों हरे पेड़ जमींदोज कर दिये गये. इस संबंध में तब वन क्षेत्र पदाधिकारी विश्वनाथ प्रसाद से बात की गयी, तो उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के तहत सीसीएल को जमीन दी गयी है. दी गयी जमीन से ज्यादा भाग में काम किया गया है या पेड़ों को काटा गया है, तो जांच के बाद कार्रवाई की जायेगी.

ग्रामीण अधिग्रहीत जमीन को बता रहे विवादित

उल्लेखनीय है कि ग्रामीण केडीएच द्वारा अधिग्रहीत 390.95 एकड़ जमीन विवादित बता रहे हैं. विस्थापित नेता विश्वनाथ गंझू ने बताया कि उक्त 390 एकड़ में वन भूमि, रैयती तथा गैरमजरूआ जमीन है. उन्होंने आरोप लगाया कि अंचल की मिलीभगत से जितना जमीन है उससे ज्यादा जमीन कागज में बंदोबस्त कर दी गयी है. इस संबंध में मुख्यमंत्री से लेकर संबंधित विभाग को जांच के लिए दिया गया है. जब तक जांच कर फर्जी बंदोबस्ती को रद्द नहीं किया जाता है, आगे का विस्तारीकरण नहीं होने देंगे. बिरसा विस्थापित मंच के अध्यक्ष सह विस्थापित नेता बहुरा मुंडा ने कहा कि 28 हेक्टेयर जमीन पर खदान चलाने के लिए वन विभाग की ओर से अनापत्ति के साथ अनुमति दी गयी थी, लेकिन प्रबंधन ने 2013 में अधिग्रहीत 390 एकड़ जमीन पर माइनिंग शुरू कर दी है. इस जमीन पर खदान चलाने के लिए ग्रामसभा में अनापत्ति भी नहीं लिया गया है.

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