बुनियादी समस्या दूर कर साइडिंग बनाने पर सहमति

Updated at : 10 Dec 2016 8:19 AM (IST)
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बुनियादी समस्या दूर कर साइडिंग बनाने पर सहमति

पिपरवार : सीसीएल पिपरवार रेलवे साइडिंग के अंतर्गत सिदालू में प्रस्तावित नयी रेलवे साइडिंग निर्माण को लेकर शुक्रवार को उमवि सिदालू प्रांगण में ग्रामसभा का आयोजन किया गया. पूर्व मुखिया अलेक्जेंडर तिग्गा की अध्यक्षता में आयोजित ग्रामसभा में सीसीएल अधिकारियों के अलावा साइडिंग से प्रभावित ग्राम सिदालू, बिजैन व कनौदा-राजधर के ग्रामीण शामिल हुए. पिपरवार […]

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पिपरवार : सीसीएल पिपरवार रेलवे साइडिंग के अंतर्गत सिदालू में प्रस्तावित नयी रेलवे साइडिंग निर्माण को लेकर शुक्रवार को उमवि सिदालू प्रांगण में ग्रामसभा का आयोजन किया गया. पूर्व मुखिया अलेक्जेंडर तिग्गा की अध्यक्षता में आयोजित ग्रामसभा में सीसीएल अधिकारियों के अलावा साइडिंग से प्रभावित ग्राम सिदालू, बिजैन व कनौदा-राजधर के ग्रामीण शामिल हुए.
पिपरवार परियोजना के सौजन्य से होनेवाली प्रस्तावित साइडिंग निर्माण को लेकर ग्रामीणों से अनापत्ति प्रमाण को लेकर राय ली गयी. पिपरवार पीओ वीके शुक्ला ने साइडिंग निर्माण के बाद होनेवाले फायदे व ग्रामीणों के विकास व रोजगार के मिलने वाले अवसर की जानकारी दी. ग्रामीणों ने प्रस्तावित साइडिंग निर्माण की योजना पर विचार रखते हुए कहा कि अधिग्रहीत जमीन के एवज में लंबित नौकरी-मुआवजा के साथ यदि प्रबंधन ग्रामीणों की बुनियादी समस्याओं को सुलझा देता है, तो उन्हें साइडिंग निर्माण में कोई आपत्ति नहीं है.
प्रभावित ग्रामीणों के अनुसार अशोक परियोजना के लिए अधिग्रहीत जमीन के बदले लगभग 80 फीसदी विस्थापितों को नौकरी मिल चुकी है जबकि मुआवजा का भुगतान हुआ ही नहीं है. प्रबंधन शेष नौकरी व मुआवजा का भुगतान करे. बिजैन के विस्थापितों के पुनर्वास के लिए प्लाटिंग करने, ब्लास्टिंग, धूल-गर्द की समस्या का निदान करने की मांग रखी गयी. इसके अलावा गांव में बिजली, पानी, शौचालय, सड़क की सुविधा के अलावा प्रदूषण की रोकथाम हेतु कदम उठाये जाने की जरूरत बतायी गयी. कनौदा व सिदालू के ग्रामीणों ने भी साइडिंग निर्माण से होनेवाली धूल-गर्द की समस्या के प्रति आशंका व्यक्त करते हुए रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही. प्रस्तावित साइडिंग की वन भूमि को लेकर अाशंका जताते हुए जोत-आबाद कर रहे लोगों को वन विभाग द्वारा भूमि का पट्टा उपलब्ध कराने की बात रखी गयी.
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने रखी अपनी बात
प्रबंधन की ओर से ग्रामसभा की पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकार्डिंग करायी गयी. उक्त मुद्दे पर सुरेश गंझू ने कहा कि डस्ट का समाधान व रोजगार का अवसर जरूरी है. वीरेंद्र उरांव ने कहा कि धूल-गर्द से बचाव के साथ जोत-आबाद करनेवालों को क्षतिपूर्ति मिलना चाहिए.
कुलदीप राम ने कहा कि कुछ लोगों की गैरमजरूवा जमीन साइडिंग में पड़ती है, जिसका सत्यापन नहीं हुआ है. इसमें प्रबंधन को मदद करना होगा. झरी राम का कहना था कि साइडिंग बने लेकिन आसपास के लोगों की बुनियादी समस्याओं को दूर करने के बाद. मंजू देवी ने कहा कि धूल-गर्द से समस्या बढ़ेगी. मवेशियों की अलग समस्या रहेगी. रोजगार के अवसर जरूरी हैं. रवींद्र गंझू ने कहा कि अशोक खदान गांव से करीब पहुंच गया है.
बिजैन के लोगों को काफी परेशानी हो रही है. कुएं सूख गये हैं. पानी की भारी किल्लत है. ईश्वर राम ने कहा कि गांव से 50 मीटर पर खदान पहुंच गया है लेकिन अब तक पुनर्वास का हल नहीं निकाला जा सका. ब्लास्टिंग से काफी परेशानी हो रही है. आश्वासन के बावजूद शौचालय का निर्माण नहीं कराये जाने से महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. समस्या दूर नहीं होगी, तो साइडिंग कैसे खुलेगा. शत्रुघ्न पाहन का कहना था कि जो वादे पहले किये गये हैं वे ही पूरे नहीं हुए. पहले सही व्यवस्था करें फिर साइडिंग खोलें. कनौदा के निर्मल उरांव ने कहा कि 20 घरों वाले उनके गांव में एक भी रास्ता नहीं है. रेलवे लाइन बन जाने से साइकिल से जाने में भी परेशानी है.
राजधर की मंजू देवी ने हर घर को रोजगार, पानी, रोड, बिजली, चापानल दें, फिर साइडिंग खोलने की बात कही. अर्जुन गंझू ने कहा कि खदान खुलने के 20 वर्षों के बाद भी नौकरी-मुआवजा नहीं निबटाया जा सका है. सीएसआर से आज तक कोई काम यहां नहीं हुआ है. बुनियादी सुविधाएं देने के बाद साइडिंग खोलने में कोई परेशानी नहीं है. उप मुखिया तानेश्वर उरांव ने कहा कि फॉरेस्ट लैंड की जमीन के दखलकारों को पट्टा दिया जाये.
छोटी-मोटी समस्या को नजरअंदाज किया जा सकता है लेकिन बुनियादी सुविधाएं मुहैया करायी जानी चाहिए. समाजसेवी निर्मल उरांव ने ग्रामीणों की बुनियादी समस्याओं के निराकरण के बाद साइडिंग खोले जाने की हिमायत की. पूर्व मुखिया अलेक्जेंडर तिग्गा ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा उठाये गये सवालों पर प्रबंधन को गंभीरता से विचार करना चाहिए. साइडिंग खोलने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है बशर्ते लंबित मांगे व बुनियादी सुविधाएं मुहैया करा दी जाये.
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