झारखंड में बंद हो जाएंगी कोयले की कई पुरानी खदानें, कोल श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट

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झारखंड में घाटे का सौदा साबित हो रही हैं कई पुरानी खदानें.

Coal Mines Closure: झारखंड में आने वाले 10 सालों में कई पुरानी कोयला खदानें बंद होने की कगार पर हैं. क्षमता से 68% कम उत्पादन करने वाली खदानों पर संकट गहराया है. रिपोर्ट के मुताबिक 44 हजार हेक्टेयर जमीन पर खनन बंद हो सकता है, जिससे लाखों श्रमिकों की आजीविका पर असर पड़ेगा. वहीं राज्य में 2.3 लाख ग्रीन जॉब्स की संभावना भी जताई गई है.

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रांची से मनोज सिंह की रिपोर्ट

Coal Mines Closure: झारखंड में आने वाले 10 सालों में कोयले की कई पुरानी खदानें बंद हो जाएंगी. राज्य में करीब 44 हजार हेक्टेयर जमीन से कोयले की खुदाई बंद हो जाने की आशंका जताई गई है. यह ऐसी जमीन है, जिनसे क्षमता का 68% से भी कम कोयले की खुदाई हो रही है. कुछ जगह पर तो कंपनियों के लिए कोयले की खुदाई करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है. कोयले की पुरानी खदानों के बंद हो जाने की वजह से राज्य के लाखों कोल श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा.

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कोयले की खुदाई के लिए 62 हजार हेक्टेयर जमीन

झारखंड में करीब 62 हजार हेक्टेयर जमीन कोयले की खुदाई के लिए आवंटित की गई थी. अभी करीब 50 हजार हेक्टेयर में कोयले की खुदाई की जा रही है. इसमें कोल इंडिया की कंपनियों के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियों के कैप्टिव माइंस हैं. इससे करीब 300 मिलियन मीट्रिक टन कोयला प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) निकल रहा है. इसमें 288 एमएमटीपीए कोयला ओपेन कॉस्ट और करीब 12 मिलियन टन अंडर ग्राउंड से निकल रहा है. इसमें प्रत्यक्ष तौर पर करीब 85 हजार से अधिक मजदूर लगे हुए हैं.

बंद खदानों के पास पड़ी है 11 हजार हेक्टेयर जमीन

राज्य में बंद खदानों के पास करीब 11185 हेक्टेयर जमीन पड़ी हुई है. इसमें ओपेन कास्ट की 4720 और अंडर ग्राउंड माइंस की करीब 6485 हेक्टेयर जमीन शामिल है. इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरमेंट, सस्टनेब्लिटी एंड टेक्नोलॉजी (आइ-फॉरेस्ट) ने झारखंड में ग्रीन ग्रोथ और ग्रीन जॉब्स की संभावना पर स्टडी कराया है. इसमें अगले 10 सालों में झारखंड में खदानों के बंद होने के बाद उपलब्ध जमीन को इसका सबसे बड़ा स्रोत बताया है.

किसने तैयार की रिपोर्ट

ह्यूस्टन, टेक्सास (यूनाइटेड स्टेट) की संस्था स्वनिति ग्लोबल ने भारत के कोयला प्रभावित जिलों में होनेवाले संभावित बदलाव पर रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की ”कोयला राजधानी” कहे जाने वाले झारखंड के लिए आने वाले दशक बड़े बदलाव के संकेत दे रहे हैं. झारखंड के 24 में से 18 जिले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोयला अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं. झारखंड में धनबाद, गिरिडीह, बोकारो और रामगढ़ जैसे पुराने कोयला जिलों में यह चुनौती सबसे गंभीर है.

2030 तक बंद हो जाएंगी धनबाद की आधी खदानें

रिपोर्ट में कहा गया है कि धनबाद की करीब आधी कोयला खदानें इस समय चालू हैं या तो बंद हैं या निष्क्रिय हैं. अनुमान है कि 2030 तक इस क्षेत्र की 80% खदानें या तो समाप्त हो जाएंगी या आर्थिक तौर पर घाटे का सौदा हो जाएंगी.

लाखों श्रमिकों की आजीविका पर खतरा

धनबाद के कोयला खदानों के बंद हो जाने से न केवल राजस्व की हानि होगी, बल्कि लाखों श्रमिकों की आजीविका पर भी खतरा मंडरा रहा है. सीसीएल वाले इलाके में रामगढ़ जिला इस संक्रमण के दौर का महत्वपूर्ण केंद्र होगा. रामगढ़ को जलवायु परिवर्तन के जोखिमों के मामले में दूसरे जिलों के मुकाबले में कम संवेदनशील पाया गया है. लेकिन, यहां की कोयला निर्भरता अभी भी बड़ी चुनौती है.

राज्य के चार जिलों में 73% कोयला खदानें

झारखंड में करीब 85 ओपेन कॉस्ट हैं, जबकि 13 अंडर ग्राउंड माइंस चल रहे हैं. राज्य के 18 जिलों में कोयला खनन हो रहा है. इसमें 73% कोयला खदानें धनबाद, हजारीबाग, चतरा और बोकारो जिले में हैं. केंद्र ने पूरे देश में 147 कोयला खदानों को आनेवाले कुछ वर्षों में फेज आउट (खनन लायक नहीं पाने ) की संभावना जतायी है.

झारखंड में 2.3 लाख ग्रीन जॉब्स की संभावना

झारखंड में कोयला खदानों के बंद हो जाने से श्रमिकों के सामने आजीविका संकट खड़ा हो तो जाएगा, लेकिन अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में संभावनाएं भी काफी हैं. आई-फॉरेस्ट की निदेशक श्रेष्ठा बनर्जी ने कहा कि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में झारखंड के पास 77 गीगावॉट की विशाल क्षमता है. जिसमें 59 गीगावॉट सौर, 15 गीगावॉट पवन और 2.8 गीगावॉट बायोमास ऊर्जा शामिल है. इस क्षमता का पूर्ण उपयोग करने से राज्य में लगभग 2.3 लाख पूर्णकालिक ग्रीन जॉब्स पैदा हो सकती है. इनमें से 68% के करीब नौकरियां सौर ऊर्जा क्षेत्र में होने की उम्मीद हैं. अगले कुछ वर्षों में बंद होनेवाली कोयला खदान एक संभावना लेकर आ सकती है.

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रोजगार के नये अवसर पैदा करने होंगे

झारखंड जस्ट ट्रांजिशन टॉस्क फोर्स के अध्यक्ष एके रस्तोगी ने कहा कि खदानें बंद होने लगी हैं. सबसे पहले गिरिडीह में खदानें बंद होगी. यहां एक सामूहिक कोशिश की जरूरत है. इसमें कोल इंडिया, भारत सरकार और राज्य सरकार को मिलकर काम करना होगा. वहां रोजगार के नये अवसर पैदा करने होंगे. समय आ गया है कि जमीन पर योजनाओं को उतारा जाये. खाली जमीन रहने पर कब्जा होगा. जब काम होने लगेगा, तो लोगों को विश्वास होगा. कुछ सही होगा. कुछ गलत होगा. इससे आगे का रास्ता निकलेगा.

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