झारखंड में गैस के बाद अब खून का संकट, रिप्लेसमेंट पर दिया जा रहा ब्लड

Updated at : 16 Mar 2026 11:35 AM (IST)
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Jharkhand Blood Crisis

झारखंड के ब्लड बैंकों में खून की कमी. एआई जेनरेटेड फोटो

Jharkhand Blood Crisis: झारखंड में ब्लड बैंकों में खून की भारी कमी सामने आई है. रांची के रिम्स और सदर अस्पताल में भी सीमित स्टॉक बचा है. मरीजों को रिप्लेसमेंट डोनर लाने के बाद ही ब्लड दिया जा रहा है. हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और मरीजों के परिजन परेशान हैं. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राजीव पांडेय की रिपोर्ट

Jharkhand Blood Crisis: झारखंड में रसोई गैस के बाद अब खून का संकट गहरा गया है. मरीजों को रिप्लेसमेंट पर ब्लड दिया जा रहा है. फिलहाल, सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स भी खून की कमी से जूझ रहा है. यहां भी परिजनों को रिप्लेसमेंट पर ब्लड मिल रहा है. वर्तमान में जिस ग्रुप का ब्लड चाहिए, उसी ग्रुप का डोनर भी लाना पड़ रहा है. रिम्स ब्लड बैंक में ए-20, बी-22,ओ-30-एबी-सात (पॉजिटिव) और निगेटिव ब्लड में सिर्फ ए निगेटिव चार यूनिट है.

वहीं, सूबे के दूसरे सबसे बड़े सदर अस्पताल में ए-दो, बी-तीन,ओ-तीन और एबी-एक (पॉजिटिव) है. जबकि निगेटिव ब्लड बैंक किसी ग्रुप का नहीं है. चिंता तब और बढ़ गयी है, जब रिम्स ब्लड बैंक में निजी अस्पताल से भी परिजन खून का मांगपत्र लेकर पहुंच रहे हैं. रिम्स अपने मरीजों को मुश्किल से खून उपलब्ध करा रहा है, उसमें निजी अस्पतालों का दबाव अलग से है.

हाईकोर्ट का क्या है निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट की ओर से 18 दिसंबर 2025 को आदेश दिया गया था कि सूबे के किसी भी निजी या सरकारी अस्पताल में रिप्लेसमेंट डोनेशन नहीं कराया जाएगा. तब स्वास्थ्य विभाग ने सभी ब्लड बैंक को रिप्लेसमेंट डोनेशन नहीं करने का निर्देश जारी किया था.

केस स्टडी-01

रिम्स के हड्डी विभाग में छोटू उरांव (22 वर्ष) भर्ती है. डॉक्टर ने उनको इमरजेंसी में खून दिलाने का निर्देश दिया है. छोटू का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है. रविवार को परिजन जब रिम्स ब्लड बैंक में खून लेने पहुंचे, तो वहां खून का कम स्टॉक होने की जानकारी दी गयी. वहीं, ए पॉजिटिव ग्रुप के डोनर को लाने के लिए कहा गया. किसी तरह परिजन ने उसी ग्रुप के डोनर का इंतजाम किये.

केस स्टडी-02

शाहिद अंसारी बरियातू स्थित क्लिनिका क्योर हॉस्पिटल में भर्ती है. उसके परिजनों को बी पॉजिटिव खून दिलाने के लिए कहा गया. जब परिजन खून के लिए रिम्स पहुंचे, तो उनको खून की कमी का हवाला दिया गया. रिम्स में भर्ती मरीजों और कुल स्टॉक के बारे में भी बताया गया. इसके बाद बी पॉजिटिव ग्रुप का ही डोनर लाने को कहा गया. डोनर लाने के बाद खून दिया गया.

क्या कहते हैं अधिकारी

झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी के निदेशक छवि रंजन कहते हैं, ‘अस्पताल में जरूरतमंद 90% मरीजों को स्वैच्छिक रक्तदान से खून उपलब्ध कराना है. स्वास्थ्य विभाग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए लोगों को हर स्तर पर जागरूक करने की कोशिश कर रहा है. अगर रिप्लेसमेंट डोनेशन की बात सामने आती है, तो इसकी जांच करायी जाएगी.’

रांची के अस्पतालों में ब्लड बैंक की स्थिति

रिम्स

पॉजिटिव : ए-20 | बी-22 | ओ-30 |एबी-7
निगेटिव : ए-4

सदर अस्पताल

पॉजिटिव : ए-2 | बी-3 | ओ-3 | एबी-1
निगेटिव : सभी शून्य

सेवा सदन ब्लड बैंक

पॉजिटिव : ए-39 | बी-62 | ओ-42 | एबी-18
निगेटिव : बी-1 | ओ-1

ब्लड बैंक मेदांता

पॉजिटिव : ए-38 | बी-32 | ओ-22 | एबी-28
निगेटिव : बी-1 | ओ-2

सैम्फोर्ड हॉस्पिटल

पॉजिटिव : ए-3 | बी-76 | ओ-62 | एबी-28
निगेटिव : बी-1 | ओ-2 | एबी-1

पारस हॉस्पिटल

पॉजिटिव : ए-4 | बी-5 | ओ-8 | एबी-2
निगेटिव : सभी शून्य

लेक व्यू हॉस्पिटल

पॉजिटिव : ए-18 | बी-38 | ओ-34 | एबी-7
निगेटिव : सभी शून्य

मां रामप्यारी हॉस्पिटल

पॉजिटिव : ए-12 | बी-15 | ओ-23 | एबी-7
निगेटिव : सभी शून्य

मणिपाल हॉस्पिटल

पॉजिटिव : ए-10 | बी-20 | ओ-33 | एबी-0
निगेटिव : सभी शून्य

रिंची हॉस्पिटल

पॉजिटिव : ए-5 | बी-6 | ओ-8 | एबी-2
निगेटिव : सभी शून्य

राज हॉस्पिटल

पॉजिटिव : ए-0 | बी-6 | ओ-6 | एबी-0
निगेटिव : बी-1 | एबी-1

हेल्थ प्वाइंट

पॉजिटिव : ए-3 | बी-2 | ओ-1 | एबी-6
निगेटिव : सभी शून्य

देवकमल

पॉजिटिव : सभी शून्य
निगेटिव : सभी शून्य

सीसीएल

पॉजिटिव : सभी शून्य
निगेटिव : सभी शून्य

गुरुनाक अस्पताल

पॉजिटिव : सभी शून्य
निगेटिव : सभी शून्य

आरची झारखंड ब्लड बैंक

पॉजिटिव : सभी शून्य
निगेटिव : सभी शून्य

झारखंड ब्लड बैंक

पॉजिटिव : सभी शून्य
निगेटिव : सभी शून्य

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सिंहपुर नर्सिंग होम

पॉजिटिव : सभी शून्य
निगेटिव : सभी शून्य

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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