होर्मुज की लहरों में मौत को छूकर आज वतन लौटेगा जमशेदपुर का अंश, पलकें बिछाकर इंतजार कर रहे पापा-मम्मी

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शिवालिक जहाज में जमशेदपुर का अंश त्रिपाठी (बाएं) और पोते के साथ माता-पिता और पत्नी. फोटो: प्रभात खबर

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Jamshedpur News: झारखंड के जमशेदपुर के सेकंड इंजीनियर अंश त्रिपाठी ने युद्ध के तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत लौटने की बड़ी जिम्मेदारी निभाई. शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के जहाज शिवालिक पर तैनात अंश की सुरक्षित वापसी से परिवार और देश में खुशी की लहर दौड़ गई है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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जमशेदपुर से अशोक झा की रिपोर्ट

Jamshedpur News: जब खाड़ी देशों के समंदर पर युद्ध के बारूदी बादल मंडरा रहे थे और पूरी दुनिया की धड़कनें होर्मुज जलडमरूमध्य की लहरों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं. तब लौहनगरी का एक जांबाज इंजीनियर अपनी सूझबूझ और अदम्य साहस से वतन के लिए ‘ऊर्जा’ की खेप लेकर मौत को मात दे रहा था. शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआइ ) के विशालकाय जहाज ‘शिवालिक’ पर तैनात सेकंड इंजीनियर अंश त्रिपाठी ने 13 मार्च को वह अग्निपरीक्षा पार कर ली. जिसकी दुआएं पूरा देश और उनका परिवार कर रहा था. करीब 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर अंश का जहाज अब सुरक्षित भारतीय सीमा की ओर बढ़ रहा है. 16 मार्च सोमवार को जब यह जहाज गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर लंगर डालेगा. तो वह केवल गैस की खेप नहीं, बल्कि एक मां की ममता और एक पत्नी के विश्वास की जीत होगी.

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26 नवंबर से मिशन, 13 मार्च को पार किया ‘खतरा’

अंश त्रिपाठी ने 26 नवंबर 2025 को शिवालिक’ पर अपनी ड्यूटी जॉइन की थी. तब किसी को अंदाजा नहीं था कि रास्ता इतना चुनौतीपूर्ण हो जायेगा. जमशेदपुर के पारडीह आशियाना वुडलैंड में रहने वाला त्रिपाठी परिवार के लिए 13 मार्च की तारीख किसी दुःस्वप्न से कम नहीं थी. यही वह दिन था जब शिवालिक को उस संकरे और खतरनाक रास्ते से गुजरना था. जहां अमेरिका और विरोधी ताकतों के बीच तनाव चरम पर था. यूएई, कतर और सऊदी अरब से इंडियन ऑयल के लिए गैस लादकर निकले इस जहाज पर हर पल हमले का साया मंडरा रहा था. परिवार के सदस्य टीवी के सामने ठिठक कर बैठे थे. मानो सांसें रोककर किसी शुभ समाचार का इंतजार कर रहे हों. फोन लग नहीं रहा था. समंदर खामोश था और दिल किसी अनहोनी की आशंका से बैठा जा रहा था. बस ईश्वर और भारत सरकार की कूटनीति ही एकमात्र सहारा थी. 13 मार्च को जब इस जहाज ने दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘होर्मुज’ को सुरक्षित पार किया. तब जाकर परिजनों ने चैन की सांस ली.

छलके पिता के आंसू: ‘साहस और संकट के बीच बीता समय’

पारडीह आशियाना वुडलैंड निवासी और यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ( यूसीआईएल) जादूगोड़ा से सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक मिथिलेश कुमार त्रिपाठी मूल रूप से बिहार के भोजपुर के रहने वाले है. प्रभात खबर से बातचीत के दौरान फफक पड़े. उन्होंने कहा कि मन में बस एक ही डर था कि कहीं मेरा बच्चा उस महाशक्तियों की जंग की भेंट न चढ़ जाये. हफ्ते भर से नींद आंखों से कोसों दूर थी. अब जब खबर आयी है कि जहाज ने होर्मुज पार कर लिया है, तो लग रहा है कि सीने से कोई भारी पत्थर हट गया है.

भगवान के अलावा किसी पर विश्वास नहीं था : मां

अंश की मां चंदा त्रिपाठी की आंखों में अब खुशी के आँसू थे. भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि पिछला एक हफ्ता बहुत भारी गुजरा. हर पल बस अनहोनी का डर लगा रहता था, पर अब जाकर चैन मिला है. मीडिया में जब भी खतरे की बात सुनती, रूह कांप जाती थी. पर आज मोदी सरकार की मुस्तैदी और भगवान की असीम कृपा ने मेरे लाल को बचा लिया. अब बस उस पल का इंतजार है जब वह घर आयेगा और मैं उसे कलेजे से लगा पाऊंगी. भगवान के अलावा किसी पर विश्वास नहीं था पर आज मोदी सरकार की पहल को धन्यवाद (थैंक्स मोदी जी) कहती हूं. ईश्वर करे युद्ध समाप्त हो और सभी बच्चे सकुशल लौटें.

पलकें बिछाए बैठी है पत्नी, पिता की राह तक रहा बेटा

अंश की पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी, जो टाटा स्टील में चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए ) हैं. पिछले कई दिनों से एक अजीब से सन्नाटे में थीं. उनका 2 वर्षीय पुत्र तनय अब भी नादान है, पर वह भी घर के माहौल को देख शायद कुछ महसूस कर रहा था. चंदा कहती हैं कि संपर्क पूरी तरह कटा हुआ था. कोई जानकारी नहीं मिल रही थी. हर पल मन में बस यही ख्याल आता कि वे किस हाल में होंगे. अब सुकून है कि वे सुरक्षित हैं और देश के लिए अपना कर्तव्य निभाकर लौट रहे हैं. यह राहत सिर्फ मेरी नहीं, पूरे देश की है.

घर में रिश्तेदारों का जमावड़ा, घनघना रहा फोन

प्रभात खबर की टीम जब अंश के घर पहुंची, तो सगे-संबंधियों और रिश्तेदार पहुंचे हुए थे. फोन की घंटी लगातार बज रही है. हर कोई अंश की कुशलता जानना चाहता है. 26 नवंबर 2025 को ड्यूटी जॉइन करने वाले अंश का यह सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा. जहां एक तरफ युद्ध की विभीषिका थी और दूसरी तरफ अपने फर्ज के प्रति समर्पण.

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अंश त्रिपाठी का करियर

  • स्कूली शिक्षा: मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल (2004) और एईसीएस नरवा और जादूगोड़ा माइंस (2008).
  • उच्च शिक्षा: बीआइटी से 2012 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और 2015 में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, केरल से मरीन इंजीनियरिंग
  • करियर: दिसंबर 2014 में शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआइ ) जॉइन किया.

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