चांद नजर आते ही माहे रमजान शुरू हुआ इबादत, रहमत व बरकत का पाक

Updated at : 01 Mar 2025 8:27 PM (IST)
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चांद नजर आते ही माहे रमजान शुरू हुआ इबादत, रहमत व बरकत का पाक

चांद नजर आते ही जिलेभर में खुशियों की लहर दौड़ गयी. रमजान मुबारक महीना शुरू होते ही मुस्लिम समुदाय में एक नया जोश और इमान की रोशनी जाग उठी.

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जामताड़ा. चांद नजर आते ही जिलेभर में खुशियों की लहर दौड़ गयी. रमजान मुबारक महीना शुरू होते ही मुस्लिम समुदाय में एक नया जोश और इमान की रोशनी जाग उठी, जैसे ही आसमान में रमजान का चांद नजर आया, शहर के मस्जिदों से अल्लाह-हू अकबर की सदाएं गूंज उठीं. लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद दी और रातभर इबादत का सिलसिला जारी रहा. माह-ए-रमजान को इस्लाम का सबसे पाक महीना माना जाता है, जिसमें रोजेदार फर्ज से लेकर मगरिब तक भूखे-प्यासे अल्लाह की रहमत और बरकत की तलब करते हैं. इस दौरान मस्जिदों में पांच वक्त की नमाज के साथ-साथ तरावीह की विशेष नमाज भी अदा की जाएगी, जिसमें कुरआन की तिलावत की जाएगी. सेहरी और इफ्तार की तैयारियां जोरों पर रमजान का चांद नजर आते ही बाजारों में जबरदस्त हलचल देखी गई. सेहरी और इफ्तार के लिए खास तैयारियां की जा रही है. दूध, खजूर, फलों, सेवइयां और खास मसालों की दुकानों पर भीड़ उमड़ पड़ी. होटल और घरों में इफ्तार स्पेशल पकवानों की खुशबू फैलने लगी. इफ्तार के दौरान खजूर से रोजा खोलने की परंपरा को निभाया जायेगा, जो पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) की सुन्नत मानी जाती है. वहीं, सेहरी में हल्के और पौष्टिक आहार लिए जाएंगे, ताकि पूरे दिन रोजेदारों को ऊर्जा मिलती रहे. खुदा की इबादत और सब्र की परीक्षा है रोजा रमजान का असल मकसद सिर्फ भूखे-प्यासे रहना नहीं, बल्कि अपने गुनाहों से तौबा करना, नेकी की राह पर चलना और गरीबों-मजलूमों की मदद करना है. इस दौरान हर रोजेदार को झूठ, गुस्सा, लालच और बुरी आदतों से दूर रहकर खुद को अल्लाह के करीब लाने का मौका मिलता है. इस पाक महीने में जकात और सदका देने की परंपरा भी निभाई जाती है, ताकि गरीब और जरूरतमंद भी रमजान की खुशियों में शरीक हो सकें. वहीं, रमजान के आखिरी अशरे (दस दिनों) में शबे-कद्र की रात भी आती है, जिसे 1000 महीनों से बेहतर माना गया है. शहर के मस्जिदों में रमजान की तैयारियां पूरी रमजान के आगमन को लेकर शहर की मस्जिदों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. इमामों और मस्जिद कमेटियों ने साफ-सफाई और सजावट पर खास ध्यान दिया है. हर साल की तरह इस बार भी रात को तरावीह की नमाज अदा की गईं, जिसमें कुरआन-ए-पाक का पाठ शुरू हो गया है. पाकडीह व सरखेलडीह जामा मस्जिद के इमाम मौलाना अख्तर राजा ने लोगों से अपील की है कि रमजान का महीना इबादत और नेक कामों में गुजारे, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगें.

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