बच्चों को कथा सुनाने से बनते हैं संस्कारी : कथावाचक

Updated at : 30 Jan 2026 9:26 PM (IST)
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बच्चों को कथा सुनाने से बनते हैं संस्कारी : कथावाचक

कुंडहित. प्रखंड के रसुनपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा जारी है.

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कुंडहित प्रखंड के रसुनपुर गांव में सात दिवसीय भागवत कथा जारी प्रतिनिधि, कुंडहित. प्रखंड के रसुनपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा जारी है. इसके तीसरे दिन शुक्रवार को वृंदावन धाम से पधारे कथावाचक गोविंद बल्लभ शास्त्री महाराज ने ध्रुव चरित्र, भरत चरित्र, अजामिल उपाख्यान, नारायण नाम व कृष्ण नाम की महिमा, भक्त प्रह्लाद चरित्र व नरसिंह अवतार का वर्णन किया. कहा कि भगवान अपने भक्तों के वशीभूत होते हैं. कहा कि बच्चों को गर्भावस्था से ही कीर्तन, भजन और कथा सुनाई जाये तो वे संस्कारी बनते हैं. माता-पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चों को अच्छे संस्कार दें और गुरु व संतों की संगति में बैठाएं, क्योंकि सत्संग से ही भगवान की निकटता प्राप्त होती है.उन्होंने ध्रुव महाराज के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि मात्र पांच वर्ष की अल्पायु में कठिन तपस्या कर ध्रुव ने भगवान की प्राप्ति की. यदि इतनी छोटी उम्र में एक बालक अपनी भक्ति से भगवान को प्राप्त कर सकता है, तो एक साधारण व्यक्ति भी निष्ठा और श्रद्धा से भजन कर भगवत कृपा प्राप्त कर सकता है. भक्त प्रह्लाद के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए महाराज ने कहा कि प्रह्लाद बचपन से ही परम भक्त थे, जबकि उनके पिता हिरण्यकश्यप अधर्मी और अत्याचारी थे. अनेकों यातनाओं के बावजूद प्रह्लाद अपने भक्ति मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए. अंततः भगवान नरसिंह अवतार के माध्यम से उनकी रक्षा हुई. उन्होंने बताया कि प्रह्लाद को बाल्यावस्था में ही नारद मुनि जैसे गुरु का सान्निध्य मिला, जिससे उन्हें प्रारंभ से ही आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त हुआ. कहा कि बच्चों को गर्भावस्था से ही कीर्तन, भजन और कथा सुनाई जाये तो वे संस्कारी बनते हैं. माता-पिता का कर्तव्य है कि वे बच्चों को अच्छे संस्कार दें और गुरु व संतों की संगति में बैठाएं, क्योंकि सत्संग से ही भगवान की निकटता प्राप्त होती है. अजामिल उपाख्यान के प्रसंग में उन्होंने बताया कि अजामिल जीवन में महापापी था, किंतु अपने पुत्र का नाम ‘नारायण’ रखने और निरंतर नाम स्मरण के कारण उसके समस्त पाप नष्ट हो गए. मृत्यु के समय भगवान श्रीहरि के पार्षद उसे बैकुंठ धाम ले गये. कहा कि भागवत में भगवान के नाम की महिमा अपरंपार है और नाम स्मरण से ही सभी पापों से मुक्ति संभव है. भागवत कथा का आयोजन पल्लीमंगल रसूनपुर के द्वारा किया गया है.

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UMESH KUMAR

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