Jamtara Vidhan Sabha: दिग्गजों ने जामताड़ा से आजमाई है किस्मत, सीता सोरेन के कारण रोचक हुआ मुकाबला

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Jamtara Vidhan Sabha : शिबू सोरेन की बहू सीता सोरेन के जामताड़ा से चुनाव लड़ने के कारण यह सीट हॉट सीट में तब्दील हो गई है. जामताड़ा विधानसभा का इतिहास रहा है कि यहां से दिग्गज नेता अपनी किस्मत आजमाते रहे हैं.
Jamtara Vidhan Sabha : जामताड़ा विधानसभा एक बार फिर सीट हॉट सीट बन गयी है. पहले भी यहां से दिग्गज नेताओं ने अपना भाग्य आजमाया है और उन्हें जीत भी मिली है. झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन खुद 2009 में यहां से उपचुनाव जीत चुके हैं. यहां से लड़ने वाले कई प्रत्याशियों शत्रुघ्न बेसरा, फुरकान अंसारी व इरफान अंसारी ने जीत दर्ज कर मंत्री तक सफर तय किया.
पांचवी बार विधायक बनने के बाद फुरकान अंसारी बिहार सरकार में बने मंत्री
वर्ष 1957 में शत्रुघ्न बेसरा कम्युनिस्ट पार्टी से चुनाव जीते थे. तब उन्हें तत्कालीन बिहार सरकार में मंत्री का दायित्व मिला था. इसके बाद लगातार पांचवीं बार चुनाव जीतने पर वर्ष 2000 में फुरकान अंसारी को बिहार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री का दायित्व मिला. हालांकि वे कार्यकाल पूरा नहीं कर पाये और झारखंड राज्य अलग बनने के साथ ही फुरकान अंसारी काे मंत्री पद त्यागना पड़ा. इसके बाद से जामताड़ा से फुरकान अंसारी विधायक नहीं बन सके. 2004 में फुरकान अंसारी को गोड्डा से संसद में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला था. इसी प्रकार लगातार दूसरी बार जामताड़ा विधानसभा से विधायक बनने वाले इरफान अंसारी को हेमंत सोरेन की सरकार में तीन महीने के लिए ग्रामीण विकास मंत्री का दायित्व मिला है.
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इस बार के चुनाव में BJP ने सीता मुर्मू पर लगाया दांव
भाजपा ने शिबू सोरेन की बड़ी बहु सीता मुर्मू पर दांव लगाया है. सीता सोरेन झामुमो के टिकट पर जामा विधानसभा से तीन बार विधायक रहीं हैं. इस वर्ष लोकसभा चुनाव के दौरान सीता मुर्मू झामुमो को छोड़कर भाजपा में शामिल हो गयीं. भाजपा ने दुमका लोकसभा से टिकट भी दिया, लेकिन सीता को झामुमो के नलिन सोरेन से हार का सामना करना पड़ा. एक बार फिर भाजपा ने जामताड़ा विधानसभा से सीता मुर्मू पर दांव लगाया है. जामताड़ा में 20 नवंबर को मतदान होना है. कांग्रेस से इरफान अंसारी, भाजपा से सीता मुर्मू के अलावा कुल 13 प्रत्याशी मैदान में हैं. जनता किसके सर पर ताज बांधती है, यह देखना दिलचस्प होगा.
राज परिवार ने भी जामताड़ा विधानसभा क्षेत्र का किया है चार बार प्रतिनिधित्व
जामताड़ा राजघराने के राजा काली प्रसाद सिंह व दुर्गा प्रसाद सिंह को प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है. 1962 के चुनाव में राजपरिवार से कालीप्रसाद सिंह पहली बार कांग्रेस पार्टी से चुनाव जीते. वे 1967 में भी कांग्रेस से चुनाव जीतने में सफल रहे. लेकिन 1972 के चुनाव में काली प्रसाद सिंह के भाई दुर्गा प्रसाद सिंह को कांग्रेस का टिकट मिला तो उन्होंने भी जीत दर्ज की. 1977 के चुनाव में भी दूसरी बार दुर्गा प्रसाद सिंह चुनाव जीतने में सफल रहे. इसके बाद से राजपरिवार से कोई भी विधायक नहीं बने.
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लेखक के बारे में
By Kunal Kishore
कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.
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