गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर आंदोलन करने का निर्णय

झारखण्ड सरकार की पेसा नियमावली भारत सरकार के मूल पेसा के अनुरूप नहीं है और झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 के साथ जोड़ा गया है.
जामताड़ा. मांझी परगना सरदार महासभा जिला जामताड़ा की बैठक प्रखंड सभागार में हुई. बैठक की अध्यक्षता मांझी परगना सरदार महासभा के जामताड़ा जिला अध्यक्ष सुनील कुमार हांसदा ने की. बैठक में मुख्य रूप से मांझी परगना सरदार महासभा के संरक्षक सह राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सुनील कुमार बास्की, बिर मांझी सह कुंडहित प्रखण्ड अध्यक्ष हराधन मुर्मू, सेवानिवृत्त शिक्षक लेबेन हांसदा, मांझी बाबा सुनील कुमार हेंब्रम उपस्थित थे. बैठक में विगत बैठक की समीक्षा के साथ ही झारखण्ड सरकार द्वारा बनायी गयी पेसा नियमावली की समीक्षा बारीकी से की गयी. भारत सरकार द्वारा बनायी गयी पेसा 1996 की भी तुलनात्मक अध्ययन के उपरांत समीक्षा की गयी. झारखण्ड सरकार की पेसा नियमावली भारत सरकार के मूल पेसा के अनुरूप नहीं है और झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 के साथ जोड़ा गया है. इस वजह से आदिवासी समाज को विरोध है. प्रस्ताव लिया गया कि समाज को हू-ब-हू पेसा कानून चाहिए. इसके लिए समाज को गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर आंदोलन करने का निर्णय लिया गया. बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि जामताड़ा उपायुक्त द्वारा पत्रांक 45 /एम 17.01.2026 को जिले के 20 बालू घाटों के लिए सभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को कैटेगरी-2 के बालू घाटों के सफल डाकवक्ता के पक्ष में ग्राम सभा कर प्रतिवेदन उपलब्ध करने के लिए निदेश जारी किया गया है, जो बिल्कुल पेसा कानून के खिलाफ है. मौके पर महादेव हांसदा, मुखिया सरोज हेम्ब्रम, नाज़िर सोरेन, नन्दलाल हांसदा, डॉक्टर सोरेन, परेश मरांडी, सज्जन मुर्मू, संजीत हेम्ब्रम, तारकेश्वर मुर्मू, राजेन हेम्ब्रम, विजय टुडू, लखिन्द्र सोरेन, शिबलाल मुर्मू, मंगल सोरेन, दरोगा मुर्मू, बाबुधन मरांडी, मांझी बाबा बैद्यनाथ हेम्ब्रम आदि मौजूद थे.
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