शहीदों को दी गयी श्रद्धांजलि

Published at :22 Feb 2017 5:27 AM (IST)
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शहीदों को दी गयी श्रद्धांजलि

विश्व मातृ भाषा दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन जामताड़ा : रेडक्रॉस सभागार में झारखंड बंग भाषी समिति द्वारा मंगलवार को विश्व मातृ भाषा दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में अनुमंडल पदाधिकारी नवीन कुमार ने भाग लिया. सबसे पहले बंगला भाषा की रक्षा के लिए शहीद हुए छात्रों को […]

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विश्व मातृ भाषा दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन

जामताड़ा : रेडक्रॉस सभागार में झारखंड बंग भाषी समिति द्वारा मंगलवार को विश्व मातृ भाषा दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में अनुमंडल पदाधिकारी नवीन कुमार ने भाग लिया. सबसे पहले बंगला भाषा की रक्षा के लिए शहीद हुए छात्रों को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गयी. विश्व मातृ भाषा दिवस पर छोटी-छोटी बच्चियों ने नृत्य प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसडीओ नवीन कुमार ने कहा कि अपनी भाषा, सभ्यता, संस्कृति की रक्षा के लिए तत्पर रहें. उन्होंने कहा कि मातृ भाषा से जो शिक्षा मिलती है और विकास हो पाता है
वो दूसरी भाषा से ऐसा संभव नहीं हो पाता है. कहा : मातृ भाषा दिवस को कांतिमय बनर्जी ने कहा कि मातृ भाषा की पढ़ाई से बच्चों का जो विकास होता है वो दूसरी भाषा से नहीं हो पाता है. इसके बिना कोई भी जाति अनाथ हो जाता है. झारखंड बंगभाषी समिति के प्रदेश संयोजक सचिन्द्र नाथ घोष ने कहा कि मातृ भाषा की लड़ाई के लिए बंगला देश के छा़त्रों ने बिगुल फूंका था. जिसमें चार छात्र अब्दूस सलाम, रुफीकुददीन अहमद, अब्दूल बरकत तथा अब्दूल जब्बार शहीद हो गये थे. 21 फरवरी 1952 में ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने प्रांतीय स्तर पर आंदोलन शुरु किया था.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेवानिवृत शिक्षक हर प्रसाद खां ने कहा कि झारखंड प्रदेश में एक बड़ी आबादी बंगला भाषा-भाषी के हैं, लेकिन यहां के लोगों को मातृ भाषा से वंचित होना पड़ रहा है. झारखंड प्रदेश के बंगाली समुदाय के बच्चे को अपनी मातृ भाषा की पढ़ाई मजबूरन छोड़ कर हिन्दी में पढ़ाई करनी पड़ती है. सरकार ने अभी तक झारखंड प्रदेश में बंगला एकाडेमिक काउंसिल का गठन नहीं कर पायी है. बच्चों को बंगला की किताबें नहीं मिल रही है. बंगला भाषा को दूसरी राज भाषा का दर्जा नहीं मिला. झारखंड प्रदेश में 42 फीसदी बंगाली समुदाय का निवास है, बावजूद बंगाली समुदाय को मातृ भाषा से वंचित रहना पड़ रहा है.
मातृभाषा, सभ्यता व संस्कृति का सम्मान करें : एसडीओ
ये भी थे मौजूद
मातृ भाषा दिवस कार्यक्रम के मंच का संचालन डीडी भंडारी ने किया. इस अवसर पर डॉ बीके सर्खेल, बिजन सर्खेल, गुणधर गोरांई, हीरामय तिवारी, संजय सरकार, पार्थ कुमार बसु, प्रदेश सरकार, चिन्मयी सरकार, अभिजीत सरकार, संजय वर्मण, मुक्ता मंडल, पिंटू मंडल, दीवाकर मंडल, दिलीप दास, अरुप मित्रा, सुजीत कुमार घोष सहित अनेकों मौजूद थे.
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