बीएसयूपी के गुलजार मोहल्ला में 72 आवासों पर अवैध कब्जा

Published at :16 Feb 2017 6:49 AM (IST)
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बीएसयूपी के गुलजार मोहल्ला में 72 आवासों पर अवैध कब्जा

आसनसोल : मेयर जितेंद्र तिवारी के निर्देश पर गुलजार मोहल्ला स्थित बीएसयूपी कॉलोनियों में बोरो चेयरमैन गुलाम सरवर और अभियंताओं की टीम ने 11 ब्लॉकों की जांच बुधवार को की. इनमें से छह ब्लॉकों के 72 आवासों पर जबरन कब्जे और चार ब्लॉकों के 24 आवासों को किराये पर दिये जाने की पुष्टि हुयी. बोरो […]

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आसनसोल : मेयर जितेंद्र तिवारी के निर्देश पर गुलजार मोहल्ला स्थित बीएसयूपी कॉलोनियों में बोरो चेयरमैन गुलाम सरवर और अभियंताओं की टीम ने 11 ब्लॉकों की जांच बुधवार को की. इनमें से छह ब्लॉकों के 72 आवासों पर जबरन कब्जे और चार ब्लॉकों के 24 आवासों को किराये पर दिये जाने की पुष्टि हुयी. बोरो चेयरमैन श्री सरवर ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद इसकी रिपोर्ट मेयर को सौंपी जायेगी. इसके बाद इस दिशा में कार्रवाई की पहल की जायेगी.

जांच टीम में नगर निगम के इंजीनियर आरके श्रीवास्तव, इंजीनियर दिलीप ठाकुर, इंजीनियर संतोष कुमार आदि शामिल थे. टीम ने गुलजार मोहल्ला के 11 ब्लॉकों ए, बी, सी, डी, इ, एफ, जी, एच, आइ,जे आदि का निरीक्षण किया और कॉलोनियों में रह रहे परिवारों से मकान के आवंटन संबंधी कागजात, पहचान पत्र और पता से संबंधित प्रमाण पत्र मांगा. छह ब्लॉकों के 72 आवासों में रह रहे लोग आवासों के आवंटन संबंधी किसी प्रकार का कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके.

जांच और पूछताछ के क्रम में पता चला कि 72 आवासों में कब्जेदार जबरन दखल कर रह रहे हैं. वहीं चार ब्लॉकों के 48 आवासों में आधे से अधिक लोग बीएसयूपी आवासों में किराये पर रहते हुए पाये गये. आवासों के असल मालिकों ने आवंटित मकानों को किराये पर दे रखा था और वे कहीं और मकान बनाकर रह रहे थे. जांच की सूचना पाकर कॉलोनियों में रह रहे लोगों में हडकंप मच गया. नेतृत्व कर रहे बोरो चेयरमैन श्री सरवर ने कहा कि अधिकांश घरों में रह रहे परिवारों के मुखिया जांच टीम के सामने आना नहीं चाह रहे थे. सख्ती बरतने पर वे जांच टीम के सामने आये और जबरन दखल कर रहने की बात भी स्वीकार की. किराये में रह रहे लोगों ने तर्क दिया कि उनके पास अपना मकान बनाने का आर्थिक सामथ्र्य नहीं है और दूसरे स्थानों पर ज्यादा किराया वहन नहीं कर सकते थे. बीएसयूपी के आवास का किराया उनके बजट में था और उनहें इलाके में तमाम सुविधाएं भी मिल रही थीं. इसलिए उन्होंने या तो इस घर पर कब्जा कर लिया या फिर भाड़ा देना शुरू किया. उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग बीएसयूपी कॉलोनियों के सामने के विद्युत पोलों से चोरी की बिजली का उपयोग कर रहे थे.

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