डायरिया से एक दर्जन लोग आक्रांत

Updated at : 18 Oct 2017 11:17 AM (IST)
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डायरिया से एक दर्जन लोग आक्रांत

नाला : प्रखंड के कास्ता पंचायत के चिचुड़बिल गांव में मौसम के बदलते ही डायरिया ने पांव पसार लिया है. गांव के करीब एक दर्जन महिला व पुरुष इसकी चपेट में आ गये हैं. ग्रामीणों की सूचना पर मेडिकल टीम गांव शिविर लगा कर पीड़ितों का इलाज शुरू कर दिया है. इधर, बीडीओ सुनील कुमार […]

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नाला : प्रखंड के कास्ता पंचायत के चिचुड़बिल गांव में मौसम के बदलते ही डायरिया ने पांव पसार लिया है. गांव के करीब एक दर्जन महिला व पुरुष इसकी चपेट में आ गये हैं.
ग्रामीणों की सूचना पर मेडिकल टीम गांव शिविर लगा कर पीड़ितों का इलाज शुरू कर दिया है. इधर, बीडीओ सुनील कुमार प्रजापति अपने दल-बल के साथ पीड़ित के घर व शिविर में पहुंच कर मरिजों का हाल जाना. ग्रामीणों की माने तो यह डायरिया का प्रकोप बीती रात 10 से ही प्रभावी है. कई मरीजों की हालत गंभीर होने पर परिजनों ने पश्चिम बंगाल के केलेजोड़ा व अन्य अस्पताल में भर्ती करा चुके हैं. फिलहाल गांव में स्थिति नियंत्रण में है. गांव के क्लब घर में शिविर शिविर लगाया गया है.
गंदगी से बचने व गर्म पीने का दिया सुझाव : शिविर में चिकित्सकों ने मरीजों को स्लाइन के अलावा ओआरएस, जिंक, मेट्रोजॉल टैबलेट, हेमोकलॉक्सीन दवा दी.
वहीं एहितियात के तौर पर कई सावधानियां भी बरतने का सुझाव दिया गया. बीडीओ सुनील कुमार प्रजापति ने ग्रामीणों को आसपास का परिवेश स्वच्छ रखने का सुझाव दिया. डॉ नदिया नंद मंडल ने ग्रामीणों को डायरिया से बचने के लिए पानी को गर्म कर पीने का सुझाव दिया.
बीडीओ से सुनायी परेशानी : बीडीओ को गांव में पाकर मौके पर ग्रामीणों ने फसल बीमा, गार्डवाल, प्रधानमंत्री आवास, शौचालय पेंशन आदि की समस्याएं भी सुनायी. बीडीओ ने समस्याओं के निराकरण का आश्वासन दिया. विदित हो कि डायरिया प्रभावित गांव का जायजा लेने के क्रम में शिविर में बीडीओ सुनील कुमार प्रजापति, समाजसेवी तापस भट्टाचार्य आदि मौजूद थे.
दो चापाकल खराब, कुएं से बुझाते हैं प्यास
कई मरीजों ने बताया कि कुआं का पानी पीते हैं. तो किसी ने कहा कि गांव में नदी किनारे अवस्थित होने के कारण मछली की उपलब्धता ज्यादा है.
कई पीड़ित परिवार का यह भी कहना है कि रात को वे लोग अत्यधिक मात्रा में नदी का मछली सेवन किया था. इसी वजह से संक्रमण हो गया है. गांव तीन चापाकल है. वह भी चालू नहीं है. मात्र एक चापाकल के भरोसे ग्रामीण प्यास बुझाते हैं. दो चापाकल खराब पड़ा हुआ है. बीडीओ ने घटनास्थल से ही विभाग के सहायक अभियंता को चापाकल मरम्मत करने का निर्देश दिया.
कौन-कौन हैं पीड़ित
चिकित्सकों की टीम मरीजों को आवश्यकतानुसार स्लाइन व दवा दे रही है. इस डायरिया की चपेट में गांव के मेहरून बीबी (35), शेख अनारूल (30), शरीफा बीबी (45), बुलकेश बीबी (45), अजय बाउरी (19), जावेद मोल्ला(17), शेख सलामुद्दीन (11,) सुकमा बीबी (20), मनीषा बीबी (18), शेख समीदुल (21), दिलखुश (45), मरजिना बीबी(25), अमीना बीबी आदि डायरिया से पीड़ित है. वहीं शेख अरसद (13), शेख आजाद (25), पश्चिम बंगाल से इलाज करा रहे हैं.
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