जमशेदपुर के वीर प्रताप मुर्मू को साहित्य अकादमी अनुवाद-2023 पुरस्कार, बोले- यकीन नहीं हो रहा…

जमशेदपुर में वीर प्रताप मुर्मू से जब उनकी इस उपलब्धि के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वर्ष 1987 में जब कॉलेज में पढ़ता था, तभी से साहित्य सृजन से जुड़ गया था.
साहित्य अकादमी नयी दिल्ली ने सोमवार को साहित्य अकादमी अनुवाद-2023 पुरस्कारों की घोषणा की. इसमें हिंदी और संताली समेत 24 भाषाओं के साहित्यकारों को पुरस्कार दिया गया. संताली भाषा के लिए जमशेदपुर के सुंदरनगर के पुड़ीहासा गांव निवासी वीर प्रताप मुर्मू को पुरस्कार मिला है.
विश्वास नहीं हो रहा, साहित्य अकादमी से पुरस्कार मिला है : मुर्मू
जमशेदपुर में वीर प्रताप मुर्मू से जब उनकी इस उपलब्धि के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वर्ष 1987 में जब कॉलेज में पढ़ता था, तभी से साहित्य सृजन से जुड़ गया था. होड़ संवाद, सोबोरनाखा समेत अन्य पत्रिकाओं में मेरी कई कविताएं और लेख छप चुके हैं. यह मेरी पहली पुस्तक है. मैंने कई पुस्तकें लिखीं हैं. उन्हें अब तक किताब का रूप नहीं दे सका.
पुरस्कार का श्रेय मित्रों और सहकर्मियों को दिया
उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा कि साहित्य अकादमी नयी दिल्ली की ओर से उन्हें पुरस्कार मिला है. इसका श्रेय वे अपने तमाम मित्रों और सहकर्मियों को देते हैं, क्योंकि उनके सहयोग के बिना पुस्तक को छापना संभव नहीं था.
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सरायकेला-खरसावां के रहने वाले हैं वीर प्रताप मुर्मू
बता दें कि वीर प्रताप मुर्मू का पैतृक गांव सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड के फूफड़ी बाड़ेडीह है. वीर को मुंशी प्रेमचंद के हिंदी उपन्यास ‘प्रतिज्ञा’ का संताली में अनुवाद पुस्तक ‘किरा’ के लिए पुरस्कार मिला है. 5 अक्तूबर 1966 को जन्मे वीर ने शिक्षा (एजुकेशन) से एमए तक की पढ़ाई की है और सरकारी प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हैं. उनके पिता टीकाराम मुर्मू का देहांत हो चुका है और माता लक्ष्मी मुर्मू गृहिणी हैं.
कहानी और कविता लिखने के साथ पौधरोपण का है शौक
वीर प्रताप मुर्मू को स्कूली बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ कहानी, कविता और लेख लिखना बहुत पंसद है. उनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में छप चुकी हैं. साहित्य सृजन में गहरी रूचि होने के साथ ही उन्हें वन और पर्यावरण से भी बहुत प्रेम है. उन्होंने वन व पर्यावरण को बचाने के लिए अपने गांव के पास पहाड़ी में 10 हजार से अधिक पौधरोपण किया है.
सामाजिक कार्यों में हैं काफी सक्रिय
वीर प्रताप मुर्मू कई सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों में सक्रिय पदाधिकारी भी हैं. वे करनडीह स्थित जाहेरथान कमेटी में संयुक्त सचिव के पद पर हैं और समाज को कुशल नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं. साथ ही, वे जाहेरथान पूजा कमेटी में सचिव, ऑल इंडिया राइटर्स एसोसिएशन पूर्वी सिंहभूम में अध्यक्ष, आदिम सांवता सुसारिया फूफड़ी बाड़ेडीह में अध्यक्ष, खेरवाड़ मार्शल मांडवा फूफड़ी बाड़ेडीह में अध्यक्ष, गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू एकेडेमी करनडीह में कोषाध्यक्ष व झारखंड स्पोर्टस क्लब करनडीह में कोषाध्यक्ष के रूप में योगदान दे रहे हैं.
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By Mithilesh Jha
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