ईरान पर मिसाइलें दागने से पहले हुआ डिजिटल अटैक, 4% तक रह गई इंटरनेट कनेक्टिविटी

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ईरान पर मिसाइलें दागने से पहले हुआ डिजिटल अटैक, 4% तक रह गई इंटरनेट कनेक्टिविटी

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद अब ईरान साइबर मोर्चे पर भी दबाव झेलता दिखा. ग्लोबल इंटरनेट मॉनिटरिंग डेटा के मुताबिक देश की इंटरनेट कनेक्टिविटी में अचानक तेज गिरावट दर्ज की गई. हालात ऐसे हो गए कि देश का बाहरी इंटरनेट ट्रैफिक सामान्य स्तर के सिर्फ 4% पर सिमट गया.

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28 फरवरी की सुबह सुर्खियां सिर्फ आसमान में उड़ती मिसाइलों और धमाकों तक सीमित नहीं रहीं. ग्लोबल इंटरनेट मॉनिटरिंग डेटा ने एक और चौंकाने वाली तस्वीर दिखाई. ईरान की इंटरनेट कनेक्टिविटी अचानक तेज गिरावट के साथ नीचे आ गई. हालात ऐसे हो गए कि देश का बाहरी इंटरनेट ट्रैफिक सामान्य स्तर के सिर्फ 4% पर सिमट गया. आसान शब्दों में कहें तो देश के अंदर-बाहर जाने वाला डेटा लगभग ठप जैसा हो गया था.

क्या कहती है NetBlocks की रिपोर्ट?

रियल-टाइम में साइबर सेफ्टी और इंटरनेट गवर्नेंस पर नजर रखने वाली स्वतंत्र संस्था NetBlocks के अनुसार, उसके नेटवर्क डेटा से साफ संकेत मिलते हैं कि 28 फरवरी को सुबह 07:00 UTC से ईरान में बड़े पैमाने पर इंटरनेट बंदी शुरू हुई. NetBlocks ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान इस समय लगभग पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट के दौर से गुजर रहा है. संस्था ने यह भी जोड़ा कि यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई जारी है. यह पैटर्न पिछले साल इजराइल के साथ हुए युद्ध के दौरान अपनाए गए उपायों से मिलता-जुलता है.

क्यों जरूरी होते हैं इंटरनेट ब्लैकआउट?

इंटरनेट ब्लैकआउट की सबसे बड़ी खासियत यही है कि बिना जमीन या आसमान में भारी संसाधन झोंके भी किसी देश की अहम क्षमताओं को कमजोर किया जा सकता है. कम्युनिकेशन सिस्टम, मीडिया ब्रॉडकास्ट, बैंकिंग नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स और सरकारी कमांड चेन सब कुछ काफी हद तक डिजिटल ढांचे पर टिका होता है. जैसे ही सूचना का प्रवाह रुकता है, फैसले लेना और तालमेल बनाए रखना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि आधुनिक युद्ध की रणनीति में सबसे पहले दुश्मन के नेटवर्क को निशाना बनाना एक अहम कदम बन चुका है.

कैसे होता है साइबर वॉरफेयर?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला एक नॉर्मल साइबर अटैक नहीं, बल्कि कई स्तरों पर चलाया गया एक इलेक्ट्रॉनिक ऑपरेशन था. इसमें सरकार और मीडिया की वेबसाइट्स को ठप करने के लिए बड़े पैमाने पर DDoS हमले किए जाते हैं. DDoS हमले में हैकर्स हजारों संक्रमित कंप्यूटरों को एक साथ किसी एक सर्वर पर ट्रैफिक भेजने के लिए इस्तेमाल करते हैं. ट्रैफिक जितना ज्यादा होता है, सर्वर पर दबाव उतना ही बढ़ता जाता है. नतीजा यह होता है कि सर्वर धीमा पड़ सकता है या पूरी तरह ठप हो सकता है. 

साथ ही, एविएशन और ऊर्जा जैसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क में गहरी सेंध लगाने की कोशिश भी शामिल रही. इतना ही नहीं, GPS, नेविगेशन और कम्युनिकेशन सिग्नल्स को बाधित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीकों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है. इसके अलावा, ब्रॉडकास्ट हाइजैकिंग की घटना भी सामने आई है.

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अंकित आनंद

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By अंकित आनंद

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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