ईरान पर मिसाइलें दागने से पहले हुआ डिजिटल अटैक, 4% तक रह गई इंटरनेट कनेक्टिविटी

Published by : Ankit Anand Updated At : 01 Mar 2026 2:05 PM

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सिर्फ 4% पर सिमट ईरान का इंटरनेट ट्रैफिक

अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद अब ईरान साइबर मोर्चे पर भी दबाव झेलता दिखा. ग्लोबल इंटरनेट मॉनिटरिंग डेटा के मुताबिक देश की इंटरनेट कनेक्टिविटी में अचानक तेज गिरावट दर्ज की गई. हालात ऐसे हो गए कि देश का बाहरी इंटरनेट ट्रैफिक सामान्य स्तर के सिर्फ 4% पर सिमट गया.

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28 फरवरी की सुबह सुर्खियां सिर्फ आसमान में उड़ती मिसाइलों और धमाकों तक सीमित नहीं रहीं. ग्लोबल इंटरनेट मॉनिटरिंग डेटा ने एक और चौंकाने वाली तस्वीर दिखाई. ईरान की इंटरनेट कनेक्टिविटी अचानक तेज गिरावट के साथ नीचे आ गई. हालात ऐसे हो गए कि देश का बाहरी इंटरनेट ट्रैफिक सामान्य स्तर के सिर्फ 4% पर सिमट गया. आसान शब्दों में कहें तो देश के अंदर-बाहर जाने वाला डेटा लगभग ठप जैसा हो गया था.

क्या कहती है NetBlocks की रिपोर्ट?

रियल-टाइम में साइबर सेफ्टी और इंटरनेट गवर्नेंस पर नजर रखने वाली स्वतंत्र संस्था NetBlocks के अनुसार, उसके नेटवर्क डेटा से साफ संकेत मिलते हैं कि 28 फरवरी को सुबह 07:00 UTC से ईरान में बड़े पैमाने पर इंटरनेट बंदी शुरू हुई. NetBlocks ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान इस समय लगभग पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट के दौर से गुजर रहा है. संस्था ने यह भी जोड़ा कि यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई जारी है. यह पैटर्न पिछले साल इजराइल के साथ हुए युद्ध के दौरान अपनाए गए उपायों से मिलता-जुलता है.

क्यों जरूरी होते हैं इंटरनेट ब्लैकआउट?

इंटरनेट ब्लैकआउट की सबसे बड़ी खासियत यही है कि बिना जमीन या आसमान में भारी संसाधन झोंके भी किसी देश की अहम क्षमताओं को कमजोर किया जा सकता है. कम्युनिकेशन सिस्टम, मीडिया ब्रॉडकास्ट, बैंकिंग नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स और सरकारी कमांड चेन सब कुछ काफी हद तक डिजिटल ढांचे पर टिका होता है. जैसे ही सूचना का प्रवाह रुकता है, फैसले लेना और तालमेल बनाए रखना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि आधुनिक युद्ध की रणनीति में सबसे पहले दुश्मन के नेटवर्क को निशाना बनाना एक अहम कदम बन चुका है.

कैसे होता है साइबर वॉरफेयर?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला एक नॉर्मल साइबर अटैक नहीं, बल्कि कई स्तरों पर चलाया गया एक इलेक्ट्रॉनिक ऑपरेशन था. इसमें सरकार और मीडिया की वेबसाइट्स को ठप करने के लिए बड़े पैमाने पर DDoS हमले किए जाते हैं. DDoS हमले में हैकर्स हजारों संक्रमित कंप्यूटरों को एक साथ किसी एक सर्वर पर ट्रैफिक भेजने के लिए इस्तेमाल करते हैं. ट्रैफिक जितना ज्यादा होता है, सर्वर पर दबाव उतना ही बढ़ता जाता है. नतीजा यह होता है कि सर्वर धीमा पड़ सकता है या पूरी तरह ठप हो सकता है. 

साथ ही, एविएशन और ऊर्जा जैसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क में गहरी सेंध लगाने की कोशिश भी शामिल रही. इतना ही नहीं, GPS, नेविगेशन और कम्युनिकेशन सिग्नल्स को बाधित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीकों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है. इसके अलावा, ब्रॉडकास्ट हाइजैकिंग की घटना भी सामने आई है.

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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