Jamshedpur news. टाटा स्टील ने हाइड्रोजन परिवहन के लिए स्टील पाइप विकसित करने की पूरी प्रक्रिया में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया

Updated at : 29 Jan 2025 6:38 PM (IST)
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Jamshedpur news. टाटा स्टील ने हाइड्रोजन परिवहन के लिए स्टील पाइप विकसित करने की पूरी प्रक्रिया में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया

इस उपलब्धि के साथ बनी भारत की पहली स्टील कंपनी

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Jamshedpur news.

टाटा स्टील ने हाइड्रोजन परिवहन के लिए पाइप विकसित करने में सफलता पायी है. इस उपलब्धि के साथ टाटा स्टील भारत की पहली स्टील कंपनी बन गयी है. टाटा स्टील के खपोली प्लांट में निर्मित एपीआइ एक्स 65 इआरडब्ल्यू पाइप्स, जो कंपनी के कालिंगानगर प्लांट में उत्पादित उच्च-गुणवत्ता वाले स्टील से तैयार किये गये हैं. यह पाइप्स हाइड्रोजन परिवहन के लिए सभी आवश्यक विशेषताएं सफलतापूर्वक प्राप्त की है. इस पाइप्स के हाइड्रोजन क्वालिफिकेशन परीक्षण रीना-सीएसएम एसपीए, इटली में किये गये, जो हाइड्रोजन से संबंधित परीक्षण और मान्यता के लिए एक प्रमुख वैश्विक एजेंसी है. यह नयी हाइड्रोजन अनुकूल एपीआइ गुणा 65 ग्रेड पाइप्स 100 फीसदी शुद्ध गैसीय हाइड्रोजन को उच्च दबाव (100 बार) पर सुरक्षित और प्रभावी ढंग से परिवहन करने के लिए तैयार हैं.

हम गर्व के साथ भारत के नेशनल हाइड्रोजन मिशन में योगदान दे रहे हैं : प्रभात कुमार

टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट मार्केटिंग एंड सेल्स फ्लैट प्रोडक्ट प्रभात कुमार ने कहा कि टाटा स्टील हमेशा से ही महत्वपूर्ण स्टील ग्रेड के निर्माण में तकनीकी नवाचार की दिशा में अग्रणी रही है. नयी इआरडब्ल्यू पाइप्स का सफल परीक्षण यह दर्शाता है कि हम ऊर्जा क्षेत्र के लिए आवश्यक भौतिक अवसंरचना को देश में ही प्रभावी रूप से तैयार कर सकते हैं. हम गर्व के साथ भारत के नेशनल हाइड्रोजन मिशन में योगदान दे रहे हैं, जो देश के स्वच्छ ऊर्जा रूपांतरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. टाटा स्टील भारत की पहली स्टील कंपनी है, जिसने इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया, बल्कि इसे सफलतापूर्वक पूरा कर घरेलू और वैश्विक स्तर पर इन विशेष ग्रेड स्टील पाइप्स की बढ़ती मांग को पूरा किया. हाइड्रोजन परिवहन के लिए स्टील की मांग 2026-27 से शुरू होने का अनुमान है. अगले पांच से सात वर्षों में कुल स्टील की आवश्यकता 350 किलो टन तक पहुंचने की संभावना है, जबकि हाइड्रोजन परिवहन के विभिन्न तरीके उपलब्ध हैं. स्टील पाइप लाइंस को बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन परिवहन के लिए आर्थिक दृष्टिकोण से सबसे अधिक उपयुक्त माना जाता है.

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