Jamshedpur News : दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने दिव्यांगता कोई बाधा नहीं, जानिये अमन की कहानी

Edited by RAJESH SINGH
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Jamshedpur News : कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा हो, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है जमशेदपुर के देवनगर निवासी 27 वर्षीय अमन कुमार ने.

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सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित होने के बावजूद अमन ने नहीं मानी हार

दृढ़ इच्छाशक्ति से अमन ने पायी सफलता, दूसरे के लिए बने प्रेरणा स्त्रोत

Jamshedpur News :

कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा हो, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है जमशेदपुर के देवनगर निवासी 27 वर्षीय अमन कुमार ने. सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आज अपनी मेहनत और लगन के दम पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में कार्यरत हैं.

अमन बचपन से ही सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित हैं, जिसके कारण उनके दोनों पैर टेढ़े हो गये और चलने-फिरने में कठिनाई होती है. लेकिन उन्होंने कभी खुद को दूसरों पर निर्भर नहीं होने दिया. उनका इलाज पहले सनातन रथ अस्पताल में हुआ, फिर हैदराबाद स्थित निम्स अस्पताल में. इसके बाद शहर के डॉ. पियूष जैन द्वारा उनके पैरों की सर्जरी की गयी. नियमित फिजियोथेरेपी से अब उनकी स्थिति में काफी सुधार हुआ है.

शैक्षणिक जीवन में भी अमन ने संघर्ष करते हुए डीएवी पटेल नगर से 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास की. इसके बाद केएमपीएम वोकेशनल कॉलेज से बीसीए की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के बाद वह सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें टीसीएस में नौकरी का अवसर मिला, जहां वे पिछले तीन वर्षों से कार्यरत हैं.

अमन ने बताया कि उनको कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं. उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के भीतर आगे बढ़ने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो दिव्यांगता कभी बाधा नहीं बनती है. उन्होंने अन्य दिव्यांग लोगों को भी प्रेरित करते हुए कहा कि आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है.

क्या है सेरेब्रल पाल्सी

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. एमएन सिंह के अनुसार, यह मस्तिष्क की वह बीमारी है, जो मांसपेशियों के नियंत्रण और शारीरिक गति को प्रभावित करती है. इसे मस्तिष्क पक्षाघात भी कहा जाता है. इसका पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन थेरेपी, दवाएं और सर्जरी से मरीज की स्थिति में सुधार लाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि 100 में एक बच्चा ऐसा जन्म लेता है, जो इस बीमारी से प्रभावित होता है. उन्होंने कहा कि जन्म के दौरान बच्चे का समुचित ऑक्सीजन नहीं मिलने से ब्रेन में प्रॉब्लम हो जाता है या जन्म के दौरान सिर में चोट लगने से भी बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं.

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