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'साहब मैं अभी जिंदा हूं' जीजा की हुई मौत, लेकिन साले का बना दिया मृत्यु प्रमाण पत्र, जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल का कारनामा

Updated at : 25 Apr 2024 9:56 PM (IST)
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एमजीएम के अधीक्षक के समक्ष फुचु हेंब्रम

एमजीएम के अधीक्षक के समक्ष फुचु हेंब्रम

जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल की ओर से जीजा की मौत होने पर साले का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है. इससे परेशान साले ने अस्पताल प्रबंधन से मुलाकात कर कहा कि साहब मैं अभी जिंदा हूं.

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जमशेदपुर, अशोक झा: साहब मैं अभी जिंदा हूं, फिर भी मेरा मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया गया, जबकि मेरे जीजा की मौत इलाज के दौरान हुई थी. ऐसा एमजीएम अस्पताल का एक और कारनामा सामने आया है. अस्पताल की लापरवाही ने एक बार फिर से एमजीएम अस्पताल की सक्रियता की पोल तो खोल ही दी है. अब कागजात में मृत घोषित फुचु हेंब्रम खुद को जीवित साबित करने के लिए एमजीएम अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं.

क्या है पूरा मामला
सरायकेला खरसावां जिले के तामोलिया निवासी फुचु हेंब्रम गुरुवार को एमजीएम अस्पताल अधीक्षक रवींद्र कुमार से गुहार लगाने भाजपा नेता विमल बैठा के साथ पहुंचे थे. अस्पताल अधीक्षक को बताया कि 30 मार्च को इलाज के लिए अपने जीजा हलधर माझी को एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया था. जहां इलाज के दौरान 1 अप्रैल को उसके जीजा की मौत हो गयी थी. जीजा का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए एमजीएम अस्पताल आने पर उसे जानकारी मिली कि कागजात में उन्हें ही मृत घोषित कर दिया गया है. नाम सुधारने के लिए वह अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं. उनसे एफिडेविट मांगा जा रहा है. तब जाकर उसने पूरे मामले की जानकारी भाजपा नेता विमल बैठा को दी. गुरुवार को फुचु हेंब्रम ने अस्पताल अधीक्षक को पत्र देकर बताया कि वह जिंदा है.

जिंदा रहते हुए भी अस्पताल ने मुझे मुर्दा बना दिया : फुचु हेंब्रम
फुचु हेंब्रम का कहना है कि गलती एमजीएम अस्पताल की है, लेकिन खामियाजा उसे भुगतना पड़ रहा है. जिंदा रहते हुए भी जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल ने उसे मुर्दा बना दिया. इसके साथ ही जीजा का मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के लिए अस्पताल का चक्कर काटना पड़ रहा है.

दोषियों पर कार्रवाई हो : विमल बैठा
भाजपा नेता विमल बैठा ने कहा कि अस्पताल में बार-बार इस प्रकार की बड़ी भूल की घटनाएं हो रही है. पूरे मामले की जांच कर दोषी पर कार्रवाई होनी चाहिए.

की जा रही है जांच
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक रवींद्र कुमार ने कहा कि आखिर ऐसा कैसे और किस परिस्थिति में हुआ, इसकी जांच की जा रही है. नाम सुधार के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. मृत्यु प्रमाण पत्र में नाम सुधार किया जायेगा.

पहले भी हो चुकी है एमजीएम में इस तरह की घटनाएं
11 जुलाई 2018 : एमजीएम के इमरजेंसी में कई घंटों तक एक मृत मरीज को स्लाइन और ऑक्सीजन चढ़ता रहा. लोगों द्वारा जानकारी देने के बाद उक्त मरीज का स्लाइन और ऑक्सीजन हटा शव को शीतगृह भेजा गया.
30 अप्रैल 2023: आदित्यपुर निवासी ललित दत्ता नामक मरीज को गंभीर चोट लगने से उसकी मौत हो गयी थी. अस्पताल ने ललित के शव को धनंजय बताकर मोर्चरी मे भेज दिया. परिजनों ने मोर्चरी में जाकर शव को देखा. तब पता चला कि ललित दत्ता का शव रखा हुआ है, लेकिन रजिस्टर में नाम धनंजय अंकित है.
20 दिसंबर 2023: डिमना बस्ती निवासी संदीप तंतुबाई के पिता गणेश तंतुबाई (53) की 17 नवंबर को सड़क हादसे में मौत हो गयी थी. गणेश के बदले उसके बेटे संदीप के नाम से मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया. जबकि संदीप जीवित था.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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