गोलगप्पा और पानी-पुरी को मात देता है पुचका, कोलकाता की गलियों में क्यों फेल हैं दिल्ली और मुंबई के जायके?

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 31 May 2026 3:39 PM

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Phuchka vs Golgappa vs Pani Puri: कोलकाता का पुचका, दिल्ली के गोलगप्पे और मुंबई की पानी-पुरी से क्यों अलग और बेहतर है? आलू के मसाले से लेकर गंधराज नींबू के पानी तक, जानें सिटी ऑफ जॉय के इस मशहूर स्ट्रीट फूड की खासियत.

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Phuchka vs Golgappa vs Pani Puri: भारत के हर शहर में आपको गोलगप्पे मिल जायेंगे, लेकिन जो रुतबा और स्वाद कोलकाता के पुचका (Phuchka) का है, वह अद्वितीय है. अक्सर लोग पानी-पुरी, गोलगप्पा और पुचका को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन स्वाद के पारखी लोगों के लिए इनमें जमीन-आसमान का अंतर है.

स्ट्रीट फूड पर क्यों है पुचका का राज

सिटी ऑफ जॉय की सड़कों पर पुचका केवल एक स्ट्रीट फूड नहीं, बल्कि एक भावना है. दिल्ली के आटे वाले गोलगप्पे हों या मुंबई की तीखी पानी-पुरी, कोलकाता के पुचके के सामने सब फीके नजर आते हैं. आइए, जानते हैं कि आखिर क्यों पुचका पूरे भारत के स्ट्रीट फूड पर राज करता है.

पुचका और गोलगप्पा के बुनियादी फर्क

कोलकाता का पुचका अपनी बनावट और भरावन (Filling) के मामले में सबसे अलग है.

  • दिल्ली में सूजी और आटे के गोलगप्पे अलग-अलग मिलते हैं, लेकिन कोलकाता का पुचका सूजी और गेहूं के आटे के एक विशेष अनुपात से बना होता है. यह गोलगप्पे से बड़ा, गहरा और कहीं अधिक कुरकुरा होता है.
  • गोलगप्पे में अक्सर उबले मटर या ठंडे आलू डाले जाते हैं, लेकिन पुचका में मैश किये हुए उबले आलू, काले चने और ढेर सारे मसालों का मिश्रण होता है. इसमें अदरक का पेस्ट और हरी मिर्च का तीखापन इसे बेमिसाल बनाता है.
  • पुचका का पानी इमली (Tamarind) और पुदीने के साथ गंधराज नींबू (Gondhoraj Lemon) की खुशबू से लबरेज होता है, जो इसे पानी-पुरी के मीठे-तीखे स्वाद से बिल्कुल अलग करता है.

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क्यों फेल हैं दिल्ली-मुंबई के जायके?

  • कोई बूंदी नहीं, सिर्फ स्वाद : मुंबई के पानी-पुरी में अक्सर रगड़ा (गर्म मटर) और पानी में बूंदी का इस्तेमाल होता है. इसके विपरीत, पुचका पूरी तरह से देसी मसालों और खट्टेपन पर निर्भर है, जिसमें किसी कृत्रिम फ्लेवर की जगह नहीं होती.
  • सरसों के तेल का तड़का : पुचका के आलू के मसाले में सरसों के तेल की हल्की-सी महक होती है, जो बंगाल के पारंपरिक स्वाद को दर्शाता है. यह ‘किक’ आपको दिल्ली के गोलगप्पे में कभी नहीं मिलेगी.
  • सस्ता और सुलभ : कोलकाता में पुचका आज भी मध्यम वर्ग और छात्रों के लिए सबसे सस्ता और तृप्त करने वाला नाश्ता है.

Phuchka vs Golgappa vs Pani Puri: पुचका खाने का बंगाली तरीका

कोलकाता में पुचका खाना एक कला है. इसे आमतौर पर साल पत्ता (सूखे पत्तों से बने दोने) में परोसा जाता है. पुचका खाने के बाद फ्री में मिलने वाली पापड़ी (बिना पानी वाला सूखा पुचका मसाला) के बिना अनुभव अधूरा माना जाता है. आप पुचका वाले से कहकर पानी को अधिक तीखा (झाल) या खट्टा करवा सकते हैं, जिसे बंगाली में ‘बेसी कोरे टक’ कहा जाता है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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