जीएसटी फर्जीवाड़ा में आरोपी-गिरफ्तार लोगों के खातों को अटैच कर रहा विभाग
Updated at : 06 Jul 2024 9:33 PM (IST)
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गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) में इनपुट टैक्स क्रेडिट फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बनाये गये नये प्रावधान का लाभ जीएसटी विभाग उठा रहा है. जीएसटी की धारा 83 का दायरा बढ़ा दिया गया है. इसके तहत किसी कारोबारी द्वारा गड़बड़ी करने का पता चलता है तो उसकी प्रापर्टी और बैंक खाते अटैच हो सकते हैं.
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जमशेदपुर :
गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) में इनपुट टैक्स क्रेडिट फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बनाये गये नये प्रावधान का लाभ जीएसटी विभाग उठा रहा है. जीएसटी की धारा 83 का दायरा बढ़ा दिया गया है. इसके तहत किसी कारोबारी द्वारा गड़बड़ी करने का पता चलता है तो उसकी प्रापर्टी और बैंक खाते अटैच हो सकते हैं. अब तक आधा दर्जन से अधिक लोगों को एक हजार करोड़ से अधिक के आइटीसी फ्रॉड के मामलों में पकड़ा जा चुका है. इन मामलों में जीएसटी अधिकारियों द्वारा संबंधित आरोपियों के खाते अटैच किये गये हैं. इसके बाद इस तरह के मामलों में इसके लिए असेसमेंट कमिश्नर से स्वीकृति लेनी होगी. सेक्शन 122 (1 ए) में यह प्रावधान किया गया है. इसमें केवल करदाता पर ही कार्रवाई नहीं, बल्कि इसमें शामिल कंपनी के निदेशक, सीए, कर सलाहकार के प्रॉपर्टी, बैंक खाते अटैच हो सकते हैं. जमशेदपुर में जीएसटी फर्जीवाड़े के मामले लगातार पकड़ में आ रहे हैं. सिंहभूम चेंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष सह अधिवक्ता राजीव अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी में कुछ बदलाव किये गये हैं, जिनके बारे में जानकारी जरूरी है. अब जितना क्रेडिट कारोबारी के रिटर्न टू ए में दिखेगा, उतना ही वह क्रेडिट क्लेम कर सकेगा. कर योग्य बिक्री 50 लाख से अधिक मासिक होने पर कुल टैक्स का एक फीसदी नकद देना होगा, भले ही इनपुट टैक्स क्रेडिट में राशि जमा हो. ई-वे बिल के प्रावधान में उल्लंघन होने पर टैक्स व जुर्माने को मिलाकर 25 फीसदी जमा करने पर अपील का अधिकार होगा. पहले जुर्माने के 10 फीसदी भरने पर अपील होती थी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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