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आदिवासी संस्कृति का सबसे बड़ा महाकुंभ, देशभर से जमशेदपुर पहुंचेंगे 2500 प्रतिनिधि, 135 तरह की होगी पारंपरिक रेसिपी

Updated at : 10 Nov 2025 10:05 PM (IST)
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Adivasi Samvaad Jamshedpur

कार्यक्रम स्थल पर हो रही तैयारी का दृश्य, Pic Credit- Prabhat Khabar

Adivasi Samvaad Jamshedpur: जमशेदपुर के गोपाल मैदान में 15–19 नवंबर तक ‘आदिवासियों का संवाद’ आयोजित होगा. देशभर की 153 जनजातियों के 2500 प्रतिनिधि आएंगे और कला, संस्कृति और व्यंजन का लुत्फ उठाएंगे.

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Adivasi Samvaad Jamshedpur, जमशेदपुर : जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में 15 से 19 नवंबर तक टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा ‘आदिवासियों का संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा. यह कार्यक्रम का 12वां संस्करण है, जिसमें देशभर की 153 जनजातियों के करीब 2500 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. इनमें 24 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के आदिवासी समुदायों के लोग शामिल होंगे.

कार्यक्रम 15 नवंबर से शुरू होगी

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा की जयंती (15 नवंबर) से होगी. पांच दिन तक चलने वाले इस आयोजन में आदिवासी संस्कृति, कला, खानपान और जीवनशैली की झलक देखने को मिलेगी.

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पहले दिन ट्राइबल आर्ट और हैंडीक्राफ्ट की प्रदर्शनी लगेगी

पहले दिन शाम 4 बजे से रात 9:30 बजे तक ट्राइबल आर्ट और हैंडीक्राफ्ट की प्रदर्शनी लगेगी, जिसमें 28 जनजातियों के 117 कलाकार अपनी कला दिखाएंगे. 31 प्रकार की पारंपरिक कलाएं यहां प्रदर्शित की जायेंगी. इसी दिन समुदाय के साथ सेटिंग पर एक फिल्म को फिल्माया जायेगा.

16 नवंबर को जनजातीय नृत्य और संगीत की दी जाएगी प्रस्तुति

16 नवंबर को सुबह 8:30 बजे से शाम 4 बजे तक पारंपरिक ‘अखरा’ का आयोजन होगा, जहां जनजातीय नृत्य और संगीत की प्रस्तुति दी जायेगी. इसके अलावा, ‘ट्राइबल हीलिंग प्रैक्टिस’ यानी पारंपरिक उपचार पद्धतियों का प्रदर्शन भी किया जायेगा.

आदिवासी व्यंजनों का स्वाद ले सकेंगे कार्यक्रम में आने वाले लोग

पूरे कार्यक्रम के दौरान लोग आदिवासी व्यंजनों का स्वाद ले सकेंगे. 60 होम कुक्स द्वारा तैयार की गयी 135 पारंपरिक रेसिपी पांचों दिन अलग-अलग मेन्यू में परोसी जायेगी. गौरतलब है कि संवाद की शुरुआत टाटा स्टील ने 15 नवंबर 2014 को की थी. यह देश के पहले कारपोरेट घराने का आदिवासियों का मेला और कॉन्क्लेव है, जिसमें आदिवासी समुदाय की जीवनशैली, उनके खानपान से लेकर कला को लोग देख सकते हैं. शहर के लोग इसमें हिस्सेदार भी होते हैं. इसके जरिये लोगों को रोजी रोजगार भी उपलब्ध होता है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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